चरखी दादरी। सरकार ने एक जुलाई से भले ही एक बार में प्रयोग होने वाले प्लास्टिक के 19 सामान पर प्रतिबंध लगा दिया हो, लेकिन दादरी शहर में ऐसा नहीं है। बैन लगने के 48 घंटे बाद भी बाजारों में कार्रवाई के लिए टीमें नहीं उतरी हैं। इसके चलते एक बार में प्रयोग होने वाले प्लास्टिक का धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। वहीं, एसडीएम अनिल यादव का कहना है कि वो नगर परिषद ईओ को टीमें गठित करने के आदेश दे चुके हैं। अब चेतावनी देने का नहीं, सीधी कार्रवाई करने का समय है। उन्होंने दुकानदारों और रेहड़ी धारकों के अलावा फेरी लगाने वालों से प्रतिबंधित प्लास्टिक सामान और पॉलिथीन का प्रयोग न करने की भी अपील की है।
दादरी शहर की अगर बात करें तो करीब साढ़े 550 रेहड़ियां हैं। इन रेहड़ियों पर प्रतिदिन 25 हजार से अधिक लोग खरीददारी करते हैं। ज्यादातर रेहड़ी धारक सामान के लिए पॉलिथीन प्रयोग करते हैं। इतना ही नहीं शहर में करीब दो हजार दुकानें हैं और 30 फीसदी से अधिक दुकानदार पॉलिथीन में ही सामान देते हैं। इन दुकानों पर करीब बीस हजार ग्राहक प्रतिदिन आते हैं। इस लिहाज से अगर देखें तो दादरी शहर में करीब 30 हजार से अधिक लोग पॉलिथीन में सामान खरीदते हैं। हालांकि सब्जी या फल खरीदने वाले कुछ ग्राहक कपड़े का थैला लेकर भी खरीददारी करने पहुंचते हैं।
एक बार में प्रयोग होने वाले और सरकार द्वारा प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग न करने की अपील डीसी श्यामलाल पूनिया ने शुक्रवार को ही प्रेस के माध्यम से की थी। साथ ही उन्होंने ऐसा करने पर 500 से लेकर 25 हजार रुपये तक के जुर्माना की कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी भी दी थी। डीसी की चेतावनी के बाद संवाददाता ने शहर के रोहतक रोड, कोर्ट रोड, सब्जी मंडी रोड और मेन बाजार में अलग-अलग स्थानों पर जाकर जायजा लिया तो दुकानदार या रेहड़ीधारक पॉलिथीन में ही सामान देते मिले, जो सही नहीं है। वहीं, इस संबंध में जब नप प्रशासक एसडीएम अनिल यादव से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि ईओ को वो पहले ही टीमें गठित कर कार्रवाई करने के आदेश दे चुके हैं। हर हाल में पॉलिथीन या प्रतिबंधित सामान बेचने और प्रयोग करने वालों पर कार्रवाई होगी।
सीवर लाइनें ब्लॉक होने का मुख्य कारण है प्लास्टिक
दादरी शहर की बेपटरी सीवर व्यवस्था से हर कोई वाकिफ है। इसके लिए काफी हद तक आम लोग भी जिम्मेदार हैं। सीवर लाइनों और नालों में काफी मात्रा में प्लास्टिक पहुंचा है, जिससे सीवर लाइनें ब्लॉक रहती हैं। तिकोना पार्क नाले की अगर बात करें तो इसमें पानी की बजाय पॉलिथीन की भरमार है।
मांग : प्रतिबंध के साथ हमें भी विकल्प दे सरकार
रेहड़ी धारक मनोज, विजय, संदीप, दिलबाग, पप्पू, पवन ने कहा कि सरकार को पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने के साथ हमें विकल्प भी देना चाहिए। प्रत्येक ग्राहक कपड़े का थैला नहीं लाता। वहीं, चाय की दुकान चलाने वाले मुकेश और जूस की दुकान चलाने वाले पुलकित ने बताया कि पॉलिथीन अब प्रयोग कर नहीं पाएंगे, जबकि विकल्प सरकार ने दिया नहीं है। ऐसे में अब तो काम छोड़ने की नौबत आएगी।
सरकार ने इस सामान पर लगाया है प्रतिबंध
- 100 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक या पीवीसी बैनर।
- निमंत्रण कार्ड और सिगरेट पैकेट।
- मिठाई के डिब्बों को पैक करने वाली प्लास्टिक फिल्म।
- प्लास्टिक के कप, प्लेटें, गिलास, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे, कटलरी।
- सजावट में प्रयोग होने वाली थर्मोकॉल की सामग्री।
- आइस्क्रीम की प्लास्टिक डंडी।
- प्लास्टिक स्टिक युक्त ईयर बर्ड।
मैं ईओ को इस संबंध में पहले ही टीम गठित कर कार्रवाई करने के आदेश दे चुका हूं। कार्रवाई हुई या नहीं इस बारे में तो ईओ ही बता सकते हैं।
- अनिल यादव, एसडीएम एवं नगर परिषद प्रशासक।
सिंगल यूज प्लास्टिक पर सरकार बैन लगा चुकी है और मेरी अपील है कि लोग प्रतिबंधित प्लास्टिक सामान की बिक्री और प्रयोग न करें। सोमवार से ही हम टीमों को कार्रवाई के लिए बाजार में उतार देंगे।
- अभे यादव, ईओ, नगर परिषद।