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Charkhi Dadri News: ड्रग कंट्रोलर का पद खाली, ब्लड बैंक नहीं हो पा रहा शुरू

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फोटो 03 सिविल अस्पताल जहां ब्लड बैंक खुलना है।संवाद - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। लंबा समय बीतने के बाद भी जिला स्वास्थ्य विभाग सिविल अस्पताल में 500 यूनिट भंडारण क्षमता का ब्लड बैंक शुरू नहीं कर पाया है। अहम बात यह है कि दो माह पहले इसका ढांचा तैयार हो चुका है, लेकिन अब तक राज्य स्तर पर इसे शुरू करने की अनुमति लेने के लिए आवेदन नहीं किया गया है। दरअसल, दादरी में ड्रग कंट्रोलर का पद खाली है और इसके चलते ही आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही। दूसरी ओर रक्त के लिए मरीजों के तीमारदारों को प्रतिदिन रोहतक पीजीआई और भिवानी ब्लड बैंक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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दादरी सिविल अस्पताल में ब्लड बैंक खोलने की योजना 2018 में तैयार हुई थी। यह योजना सिविल सर्जन के तबादले के साथ ही ठंडे बस्ते में जाती रही। नतीजन 5 साल बीतने पर केवल ढांचा ही तैयार हो पाया है और यह प्रक्रिया भी गत वर्ष पूरी हुई है। ब्लड बैंक का ढांचा तैयार करने पर स्वास्थ्य विभाग 25 लाख खर्च कर चुका है, लेकिन बावजूद इसके लोगों को ब्लड बैंक सुविधा का लाभ नहीं मिला है।
संवाददाता ने जब ब्लड बैंक शुरू करने की योजना अटकने के कारण का पता लगाया तो सामने आया कि दादरी में ड्रग कंट्रोलर का पद खाली पड़ा है। ब्लड बैंक शुरू करने से पहले राज्य स्तर पर इसकी अनुमति लेनी होती है और यह प्रक्रिया ड्रग कंट्रोलर ही पूरी करता है। साथ लगते जिलों में भी ड्रग कंट्रोलर के पद खाली हैं और इस समय आठ ड्रग कंट्रोलर ही 22 जिलों को जैसे-तैसे संभाल रहे हैं। अगर दादरी में ड्रग कंट्रोलर की नियुक्ति हो जाए तो ब्लड बैंक शुरू करने का रास्ता साफ हो जाएगा और स्वास्थ्य विभाग की योजना अनुसार जिलावासियों को इसका लाभ मिलेगा।
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पुराने भवन के दो कमरों में बन रहा ब्लड बैंक
ब्लड बैंक का ढांचा सिविल अस्पताल के दो कमरों में तैयार किया गया है। इसके लिए जगह का चयन पीडब्ल्यूडी और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने किया था। इस समय अस्पताल के पुराने भवन में ब्लड यूनिट ही है, जिसकी क्षमता अधिकतम 30 यूनिट की है। कई दफा ब्लड खत्म होने की स्थिति में मरीज के तीमारदारों को खुद ब्लड बैंक जाकर खून लाना पड़ता है।
हर साल आठ से दस हजार यूनिट होता है जिले में रक्तदान
हर साल जिले में डेढ़ सौ से अधिक रक्तदान शिविर लगाए जाते हैं, जिनमें ज्यादातर युवा ही रक्तदान करते हैं। एक साल में जिला औसतन आठ से हजार यूनिट रक्तदान करता है। सोनीपत, भिवानी, महेंद्रगढ़, रोहतक, गुरुग्राम, नई दिल्ली, रेवाड़ी आदि जिलों की ब्लड बैंक टीमें दादरी में आकर रक्तदान करती हैं। रक्तदान शिविर लगाने के मामले में जिला प्रदेश में अव्वल है।
ब्लड बैंक खुलने से ये होगा लाभ
स्वास्थ्य विभाग ने दादरी सिविल अस्पताल में ब्लड बैंक खोलने का प्रपोजल 10 नवंबर 2018 को तैयार कर सरकार को भेजा था। करीब चार साल और दो माह बीतने पर भी ब्लड बैंक शुरू नहीं हो पाया है। अगर दादरी में ब्लड बैंक खुल जाता है तो मरीजों के तीमारदारों को विभिन्न ग्रुप का ब्लड यहीं मुहैया हो जाएगा और उन्हें रोहतक और भिवानी की दूरी नहीं नापनी पड़ेगी।
ब्लड बैंक का ढांचा तैयार हो चुका है। ड्रग कंट्रोलर का पद खाली होने से हम अनुमति नहीं ले पा रहे। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी कर सिविल अस्पताल में ब्लड बैंक शुरू करवा दिया जाए।
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-डॉ. कृष्ण कुमार, सीएमओ, चरखी दादरी
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