चरखी दादरी। लंपी वायरस से मर रही गायों की सुध नहीं लिए जाने पर गोसेवक एवं जेबीटी शिक्षक मनोज आर्य ने दशहरा के दिन अपने प्राण त्यागने की चेतावनी प्रशासन को दी है। वहीं, इसे लेकर शनिवार को भी किला मैदान परिसर में गोसेवकों ने धरना दिया। सरकार व प्रशासन से गायों की सुध लिए जाने की मांग की गई।
गोसेवक मनोज आर्य ने बताया कि अगर प्रशासन व सरकार ने गायों की सुध नहीं ली तो वह दशहरा के दिन दोपहर 12 बजे लघु सचिवालय में अपने प्राण त्याग देगा। इसके लिए उसे इच्छामृत्यु की जरूरत नहीं है। वह गो भक्त होने के नाते यह कदम उठाने को विवश होने जा रहा है। मनोज आर्य ने बताया कि उसने गोचर भूमि की मांग के लिए भी कई दिनों तक संघर्ष किया था। अब लंपी वायरस से गायों के बचाव के लिए वह फैसला ले रहा है। मनोज आर्य ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि गायों के लिए आइसोलेेशन बनाया जाए। हेल्पलाइन की व्यवस्था की जाए। बीमार गायों के लिए एंबुलेंस की सुविधा हो। पशुपालन विभाग की टीमें गठित होनी चाहिए ताकि समय रहते गायों का उपचार हो सके।
वहीं, किला मैदान में विभिन्न संगठनों से जुड़े हुए गोभक्तों का धरना व भूख हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही। किसान सभा जिलाध्यक्ष रणधीर सिंह कुंगड़ ने अपना समर्थन समिति सदस्यों को दिया। शनिवार को सांकेतिक भूख हड़ताल पर कृष्ण फौगाट व रामौतार आर्य बैठे। लोगों ने प्रशासन व सरकार की कार्यप्रणाली के प्रति गहरी नाराजगी प्रकट की। कृष्ण फौगाट ने कहा कि सरकार व विभाग करोड़ों रुपये की योजनाएं शुरू करने का दावा करती हैं लेकिन गायों की सुध नहीं ली जा रही है।
कृष्ण ने कहा कि अगर सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए तो आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। इस अवसर पर संजीव तक्षक, अनुज आर्य, सत्यवान आर्य, गौरव हिंदू, नवीन योगी, सुमित शर्मा, ईश्वर शर्मा, मनोज सिंघला, परमानंद, ब्रहमानंद, जगबीर घसौला मौजूद रहे।