जिले में बने 9 माइनिंग जोन में लगभग 260 क्रशर हैं। इन क्रशर जोन में करीब 20 हजार श्रमिक काम करते हैं। क्रशर जोन में काम करने के लिए राजस्थान, बिहार, उत्तर-प्रदेश, मध्य-प्रदेश, झारखंड आदि राज्यों से श्रमिक हर साल आते हैं।
विभिन्न जिलों के साथ दूसरे प्रदेशों में जाती है निर्माण सामग्री
माइनिंग जोन से प्रतिदिन पांच हजार डंपर और ट्राले निर्माण सामग्री लेकर गुजरते हैं। दादरी के खनन क्षेत्रों से रोड़ी, डस्ट, क्रशर और पत्थर समेत अन्य भवन निर्माण सामग्री गुरुग्राम, सोनीपत, अंबाला व अन्य जिलों समेत अन्य राज्यों में पहुंचती है।
अप्रैल 2022 से फरवरी 2023 तक प्रदेश सरकार को सभी 22 जिलों से करीब साढ़े 6 अरब का राजस्व मिला था। इसमें भिवानी व चरखी दादरी ने 3 अरब से अधिक का राजस्व दिया था, जबकि नारनौल 1.19 अरब के साथ दूसरे स्थान पर रहा था। तीसरे नंबर पर पंचकूला रहा और सरकार को वहां से 54.66 करोड़ का राजस्व मिला था। चौथा नंबर करनाल और पानीपत का रहा और दोनों जिलों ने सरकार को 20.61 करोड़ का राजस्व दिया था।
चरखी दादरी से प्रतिवर्ष सरकार को करीब ढाई अरब का राजस्व मिलता है। दादरी इसमें पहले स्थान पर है। इस वित्त वर्ष में अप्रैल से अक्तूबर तक 1.90 करोड़ का राजस्व सरकार को मिल चुका है। -कोमल कुमार, खनन निरीक्षक, चरखी दादरी