चरखी दादरी। यूक्रेन में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और मंगलवार को एक भारतीय छात्र की मौत ने वहां फंसे युवाओं के परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के 15 से अधिक युवा अभी भी वहीं फंसे हैं और मंगलवार को हुई घटना के बाद तो परिजन हर आधे घंटे बाद यूक्रेन में फंसे अपने बेटा-बेटी से फोन के जरिये संपर्क कर रहे हैं। बात न कर पाने की स्थिति में उनके बच्चे संदेश के जरिये अपनी सलामती की खबर दे रहे हैं।
यूक्रेन-रूस युद्ध मंगलवार को छठे दिन भी जारी है। मंगलवार को हमले में कर्नाटक निवासी एक भारतीय छात्र की मौत हो गई। यह समाचार मिलते ही यूक्रेन में फंसे युवाओं के परिजन चिंतित हो उठे। उन युवाओं के परिजनों ने तत्काल बेटा-बेटी से फोन कर वहां के हालातों की जानकारी ली। राहत की बात यह है कि दादरी निवासी कुछ युवाओं ने परिजनों को बताया कि फिलहाल वो ठीक तो हैं, लेकिन इन हालातों में बंकर्स और फ्लैट से बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं है। विकट परिस्थितियों में फंसे बच्चों से बात करके कुछ परिजन तो भावुक हो उठे और उनकी आंखों से आंसू छलक गए।
यूक्रेन में फंसे युवाओं के अभिभावकों का कहना है कि भारतीय छात्र की मौत के बाद तो अपने बच्चों के लिए उनकी चिंता और बढ़ गई है। इन अभिभावकों का कहना है कि यूक्रेन और रूस का युद्ध शुरू होने के बाद से ही वो लगातार बच्चों की सलामती के लिए दुआ करने के साथ अपने स्तर पर हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि भारत सरकार को अब तो उनके बच्चों को वहां से निकालने के प्रयास और तेज करने चाहिए।
मौत के मुंह से निकलकर हंगरी बॉर्डर पर पहुंची निधि
मंगलवार को एक और राहत की खबर आई है। यूक्रेन में फंसी बिगोवा निवासी निधि मौत के मुंह से निकलकर हंगरी बॉर्डर पार कर गई है। निधि के परिजनों के अनुसार अब वह फ्लाइट के जरिये स्वेदश वापसी करेगी। हालांकि ये अभी कंफर्म नहीं है कि निधि की वापसी कब तक होगी।
अभिभावक बोले-बद से बदतर हो रहे हालात
यूक्रेन में फंसे आदित्य के पिता जसबीर, तिवाला निवासी दो बच्चों के पिता शमशेर, भागवी निवासी मास्टर पवन, ढाणी फौगाट निवासी बिजेंद्र ने बताया कि वहां हालात बद से बदत्तर हो रहे हैं। उनके बच्चों के पास खाद्य सामग्री की कमी है और बमबारी लगातार जारी है। सड़कों पर गोलियां चल रही हैं और उनके बच्चे सहमे हुए बंकर्स और फ्लैट में बैठे हैं।