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लेखा जोखा 2021 : केवल मास्टर प्लान बना, पेयजल मिला न हुई निकासी

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बर्तन में गिरता आपूर्ति में आने वाला दूषित पानी। - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। 2021 बीतने को है और इस साल भी शहर की वर्षों पुरानी पेयजल और सीवर समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया। जनस्वास्थ्य विभाग के प्रयासों की अगर बात करें तो इस साल सीवर-पेयजल समस्याओं के निदान का मास्टर प्लान जरूर तैयार हुआ है, लेकिन इसे धरातल पर उतारने की अब तक मंजूरी और बजट नहीं मिला है। सीवर और पेयजल समस्याओं का निराकरण करने पर करीब 60 करोड़ रुपये खर्च होने प्रस्तावित है। ऐसे में वर्ष 2022 से ही शहरवासियों को इन मूलभूत समस्याओं से निजात मिलने की उम्मीद है।
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शहर में 21 वार्ड हैं और आबादी 80 हजार से पार है। पेयजल आपूर्ति के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने दो जलघर बना रखे हैं। इनकी भंडारण क्षमता 3700 लाख लीटर है जबकि शहर की आबादी के अनुरूप जरूरत करीब 7500 लाख लीटर की है। भंडारण क्षमता कम होने के कारण जनस्वास्थ्य विभाग एक दिन छोड़कर शहर में आपूर्ति करता है। ऐसे में कॉलोनियों में पेयजल संकट गहराया रहता है। दूसरी ओर दूषित और सीवर युक्त पेयजल आपूर्ति भी मुख्य समस्या है। इसका कारण शहर में चार दशक पुरानी सीमेंटिड पेयजल व सीवर लाइनें होना है। पेयजल संबंधी इन दोनों समस्याओं से निजात दिलाने की योजना जनस्वास्थ्य विभाग ने सितंबर 2021 में तैयार की हैं।
इसी प्रकार की सीवर व्यवस्था की बात करें तो ज्यादातर वार्डों में हाल बुरे है। सीवर लाइनें ब्लॉक होने से दूषित पानी की निकासी सुचारु रूप से नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर रामनगर एसटीपी की मुख्य 36 इंची लाइन क्षतिग्रस्त होने से इससे जुड़े चार वार्डों में सीवर सिस्टम ध्वस्त है। दूसरी ओर समसपुर एसटीपी की भंडारण क्षमता भी अब आधी ही रह गई है। यहां बने टैंक का आधा हिस्सा एनएच-152 डी में आने से अधिगृहीत हो चुका है। एसटीपी से आगे पानी की निकासी करने के लिए 35 किलोमीटर लंबी लाइन डाली जा रही है। इस लाइन के जरिये ड्रेन नंबर आठ में पानी की निकासी की जाएगी। 2022 में ही यह प्रोजेक्ट पूरा होने की उम्मीद है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि जर्जर लाइनें बदलने और 35 किलोमीटर लंबी लाइन का काम पूरा होने के बाद शहर में सीवर समस्या नहीं रहेगी।
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- पांच बार फूंका मुख्यमंत्री का पुतला, 30 से अधिक बार हुई नारेबाजी...नहीं बदले हालात
सीवर और पेयजल समस्याओं का समाधान करवाने की मांग को लेकर शहरवासियों ने कई दफा प्रदर्शन भी किए। 2021 में सीवर-पेयजल समस्याओं पर पांच बार मुख्यमंत्री का प्रतीकात्मक पुतला फूंका गया जबकि 30 से अधिक बार नारेबाजी भी की गई। इसके बाद भी अभी तक धरातल पर दोनों व्यवस्थाओं में सुधार नजर नहीं आया।
- आबादी के अनुरूप नहीं बढ़े संसाधन
पेयजल और सीवर समस्याओं के साथ जनस्वास्थ्य विभाग के पास संसाधनों की भी कमी है। शहर की आबादी बढ़ने के साथ विभाग अपने संसाधनों का दायरा नहीं बढ़ा पाया। यहां तक की जिला बनने के बाद भी मुख्यालय पर पर्याप्त स्टाफ की तैनाती नहीं हो पाई।
- मुख्य जलघर की 2450 तो रामनगर जलघर की 1250 लाख लीटर है क्षमता
शहर में इस समय दो जलघर हैं। मेन चंपापुरी जलघर की क्षमता 2450 लाख लीटर और दूसरे रामनगर-कपूरी जलघर की क्षमता 1250 लाख लीटर है। इस प्रकार पेयजल क्षमता इस समय 3700 लाख लीटर है जबकि 7500 लाख लीटर क्षमता करने की जरूरत है। जिला में इस समय 58 जलघर हैं।
- निवर्तमान पार्षद बोले : सीवर व पेयजल व्यवस्था की खुली हुई है पोल
निवर्तमान पार्षद महेश गुप्ता, आनंद महराणा, दिनेश जांगड़ा, प्रवीन सैनी, रविंद्र गुप्ता, बख्शी सैनी, पार्वती सैनी, विक्र श्योराण, ऊषा चौहान, ज्योति देवी आदि का कहना है सीवर और पेयजल शहर की सबसे बड़ी समस्या है। पिछले लंबे समय से इन व्यवस्थाओं की पोल खुली हुई है। शहरवासियों को दोनों मूलभूत समस्याओं से निजात दिलाना बेहद जरूरी है।
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वर्जन::
सीवर और पेयजल समस्याओं से छुटकारा दिलाने का मास्टर प्लान तैयार कर विभाग मुख्यालय भेज चुका है। जल्द ही इसे वहां से स्वीकृति मिल जाएगी और बजट जारी होते ही हम काम शुरू करवा देंगे। वर्ष 2022 में शहरवासियों को पेयजल व सीवर समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा और इसके लिए हमने जरूरी योजनाएं तैयार कर ली हैं।
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दलबीर दलाल, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग
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फोटो 08
ठप सीवर व्यवस्था के चलते सड़क पर भरा दूषित पानी।
फोटो 09
बर्तन में गिरता आपूर्ति में आने वाला दूषित पानी।

ठप सीवर व्यवस्था के चलते सड़क पर भरा दूषित पानी।- फोटो : CharkhiDadri

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