चरखी दादरी। आर्य समाज मंदिर में महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती की 200वीं जन्म जयंती कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता कर्मवीर सिंह छिक्कारा की अध्यक्षता में हवन किया गया। आचार्य नितिन आर्य ने पर्यावरण शुद्धि एवं विश्व कल्याण की कामना से वेद मंत्रों के साथ हवन संपन्न करवाया। संयोजक सोमवीर सिंह आर्य ने महर्षि दयानंद के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा किम हर्षि दयानंद ने नारी शिक्षा, अछूतोद्धार, स्वदेशी जागरण का प्रचार-प्रसार किया। प्रोफेसर जयप्रकाश गुप्ता ने महर्षि के जीवन से जुड़े संस्मरण सुनाए।
सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक श्याम सुंदर चाबा ने महर्षि के वेदोद्धार, विधवा पुनर्विवाह, देश की स्वतंत्रता आदि में योगदान पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि हम सब पहले स्वयं आर्य एवं श्रेष्ठ बनें तभी दूसरों का सुधार कर सकते हैं। डाॅ. चंद्रप्रकाश चावला ने दयानंद का गीत भारत का कर गया बेड़ा पार वो मस्ताना योगी सुनाया। बबीता आर्य ने स्वामी दयानंद को अद्भुत शक्ति पुंज कहते हुए गीत सुनाया। मुख्याध्यापक रामकिशन ने स्वामी दयानंद की शिक्षा पद्धति, स्त्री शिक्षा के लिए उनके योगदान को रेखांकित किया। प्रोफेसर देवदत्त आर्य ने अपने उद्बोधन में श्रवण, मनन, निदिध्यासन व साक्षात्कार का विवेचन किया। देवीदत्त गुप्ता ने देश के प्राचीनतम नाम आर्यावर्त की महिमा का वर्णन किया।
अध्यक्षीय भाषण में आर्य समाज के प्रधान कर्मवीर छिकारा ने महर्षि दयानंद की 200वीं जयंती पर बधाई देते हुए महर्षि की शिक्षाओं को अपने आचरण में उतारने का आह्वान किया। इस अवसर पर राम सिंह श्योराण, डॉ.. रामफल मलिक, रामकिशन जांगड़ा, अमनदीप आर्य, उत्तम सिंह आर्य, सावित्री शास्त्री, कौशल्या छिकारा, हरबंस कौर, शक्ति सिंह आर्य, पूर्णचंद खन्ना, रवि आर्य, आर्यांश, आत्मानंद आर्य, राजेश आर्य, मुख्याध्यापक रामकिशन, स्वरूप सांगवान, सुनीता, दीपक छिक्कारा, प्रीति आदि उपस्थित रहे।