हरियाणा में भाजपा की नई सरकार का गठन हो चुका है। कैबिनेट में कुल 13 मंत्री हैं। इनमें छह मंत्री ऐसे हैं जो पिछली सरकार में भी मंत्री थे। वहीं इस बार कैबिनेट में दो महिलाओं को भी जगह मिली है।
भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा सरकार के गठन में प्रदेश की सभी छह बेल्टों को साधने का प्रयास किया है। भाजपा ने एक भी बेल्ट ऐसी नहीं छोड़ी, जिसकी सरकार में भागीदारी न हो। हर बेल्ट से किसी न किसी नेता को कैबिनेट में शामिल किया गया है।
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खास बात ये है कि भाजपा ने सबसे अधिक सीटें जिताने वाली जीटी बेल्ट पर खास मेहरबानी की है। इस बेल्ट से मुख्यमंत्री के अलावा चार मंत्री भी बनाए गए हैं। ब्रज बेल्ट से तीन मंत्री बनाए गए हैं। वहीं, अहीरवाल और बांगर से 2-2, देशवाली और बागड़ी बेल्ट से एक-एक नेता को मंत्री बनाया गया है।
जीटी बेल्ट में भाजपा की 14 सीटें, सीएम के अलावा 4 मंत्री
जीटी बेल्ट की बात करें तो इसके अंतर्गत 23 विधानसभा सीटें आती हैं। इस बार भाजपा ने यहां 14 सीटें जीती हैं। इसलिए इस बेल्ट को अपने साथ जोड़े रखने के लिए मुख्यमंत्री के अलावा चार मंत्री मिले हैं। सीएम नायब सिंह सैनी खुद लाडवा से विधायक हैं, जबकि यमुनागर के रादौर से श्याम सिंह राणा, अंबाला कैंट से अनिल विज, पानीपत ग्रामीण से महिपाल ढांडा और इसराना से कृष्ण लाल पंवार को कैबिनेट में स्थान दिया गया है।
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अहीरवाल में 10 सीटें जीतीं, दो मंत्री बनाए
अहीरवाल बेल्ट में कुल 11 विधानसभा सीटें आती हैं। यहां पर भाजपा ने 10 सीटें जीती हैं। भाजपा ने इस क्षेत्र के वोट बैंक को साधने के लिए दो मंत्री बनाए हैं। राव इंद्रजीत सिंह की बेटी आरती राव और राव नरबीर सिंह को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। यहां पर भाजपा हाईकमान ने राव इंद्रजीत को अधिक तवज्जो नहीं दी है, बल्कि उनके सामने उनके धुरविरोधी राव नरबीर का कद बढ़ाया है।
हुड्डा का गढ़ माने जाने वाली देशवाली बेल्ट से भी एक मंत्री
देशवाली बेल्ट की बात करें तो इसमें कुल 14 विधानसभा सीटें आती हैं। इस बेल्ट को पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ माना जाता है। इस बार भाजपा ने यहां पर 8 सीटें जीती हैं। लेकिन भाजपा ने पूरी रणनीति के तहत हुड्डा के गढ़ में सेंध लगाई। भाजपा ने इस बेल्ट से अपनी गैर जाट राजनीति को आगे बढ़ाते हुए गोहाना के विधायक डाॅ. अरविंद शर्मा पर भरोसा जताया है। अरविंद शर्मा पहले ऐसे नेता हैं, जो दो बार करनाल से और रोहतक तथा सोनीपत से एक-एक बार सांसद रह चुके हैं।
बागड़ी बेल्ट की कमान चौधरी बंसीलाल परिवार को
राजस्थान के साथ लगते जिलों को बागड़ी बेल्ट में माना जाता है। इसमें कुल सीटें 16 हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां 6 सीटें जीती हैं, जबकि 2019 में यहां से भाजपा ने 8 सीटों पर कब्जा जमाया था। इस बार इस बेल्ट के लिए भाजपा हाईकमान ने चौधरी बंसीलाल परिवार पर भरोसा जताया है। चौधरी बंसीलाल की पौत्री श्रुति चौधरी को कैबिनेट में स्थान देकर भाजपा ने उनको बड़ी जिम्मेदारी दी है। पिछली बार यहां से जेपी दलाल, रणजीत चौटाला मंत्री थे।
दो मंत्रियों के भरोसे बांगर बेल्ट
बांगर बेल्ट में कुल 14 सीटें आती हैं। यह प्रदेश के बीच का स्थान है और कैथल, जींद, हिसार और फतेहाबाद जिले का कुछ हिस्सा इसमें आता है। इस बार भाजपा ने यहां सबसे अधिक 8 सीटें जीती हैं। इस बेल्ट से भाजपा ने नरवाना से विधायक कृष्ण बेदी और बरवाला से विधायक रणबीर गंगवा को मंत्री बनाया है। जींद से विधायक डाॅ. कृष्ण मिड्डा मंत्री बनने से चूक गए।
मेवात-ब्रज बेल्ट को साधने के लिए तीन नेताओं को बनाया मंत्री
मेवात-ब्रज बेल्ट में कुल 12 विधानसभा सीटें आती हैं। क्योंकि मेवात की तीनों सीटों पर भाजपा हारी है। ब्रज भाषा की 9 सीटों पर भाजपा ने 6 सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस 3 सीटें जीत पाई है। इसलिए भाजपा ने ब्रज बेल्ट को आगे के लिए साधे रखने के लिए यहां से तीन नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया है। पलवल से गौरव गौतम, फरीदाबाद से विपुल गोयल और तिगांव से राजेश नागर को मंत्री बनाया है।
10 जिलों की मंत्रिमंडल में साझेदारी नहीं, जहां एकतरफा जीती उनको भी मौका नहीं
इस बार प्रदेश के दस ऐसे जिले हैं, जिनकी सरकार में साझेदारी नहीं हो पाई। इनमें से नूंह, रोहतक, झज्जर, सिरसा और फतेहाबाद ऐसे जिले हैं, जहां पर भाजपा का कमल नहीं खिल पाया था। दूसरी ओर, पांच ऐसे जिले हैं, जहां भाजपा जीती, लेकिन यहां के विधायकों को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिल पाया। करनाल की पांचों सीटों, रेवाड़ी की तीन और चरखीदादरी जिले की दोनों सीटों पर भाजपा जीती हैं, लेकिन इन जिलों को भागीदारी नहीं मिली। पंचकूला के कालका से भाजपा की शक्ति रानी शर्मा, कैथल के पूंडरी से भाजपा के सतपाल जांबा विधायक हैं, लेकिन इनको भी मौका नहीं दिया गया।
9 लोकसभा क्षेत्र कवर, एक से कोई नहीं
हरियाणा में लोकसभा की दस सीटों में से नौ को सरकार में जगह मिल गई है। रोहतक लोकसभा क्षेत्र मनोहर सरकार की तरह इस बार नायब सरकार में भी साझा नहीं हो पाया है। इस लोकसभा क्षेत्र के 9 हलकों में से 7 पर कांग्रेस ने जीत हासिल की है। कोसली से भाजपा के अनिल ढहीना और बहादुरगढ़ से निर्दलीय राजेश जून चुनाव जीते हैं।