कई महीनों से सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर निशाना साध रहे हरियाणा कांग्रेस के ही राज्यसभा सांसद चौ. बीरेंद्र सिंह अब थोड़े हताश नजर आने लगे हैं।
शनिवार को बड़ौदा गांव में आयोजित जनसभा में उन्होंने कहा कि अगले वर्ष होने वाले चुनाव में शायद वे अपनी आखिरी राजनीतिक लड़ाई लड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि मैं चालीस साल से राजनीतिक संघर्ष कर रहा हूं, अब मैं लंबी लड़ाई नहीं लड़ सकता। मेरे जीवन की यह आखिरी राजनीतिक लड़ाई हो सकती है। इसलिए आप लोगों को चाहिए कि मेरा साथ दें।
उन्होंने कहा कि बड़ौदा गांव के लोग चुनाव में मुझसे क्यों नाराज होते हैं, यह बात अब तक समझ में नहीं आई। मेरे से अगर कोई गलती हुई है तो मुझे कम से उस गलती के बारे में बताएं ताकि उसे दूर कर सकूं।
इससे पूर्व यहां 10 लाख रुपये की लागत से बने राजीव सेवा सदन का उद्घाटन किया और पांच लाख रुपए की लागत से बनने वाली आंगनबाड़ी केंद्र, कश्यप चौपाल निर्माण का शिलान्यास किया।
गांव की तरफ से सरपंच धर्मेंद्र चहल ने उन्हें चांदी की गदा भेंट की। पंचायत द्वारा गांव में वर्षों पुरानी रेलवे स्टेशन की मांग को मंजूर करवाने पर विकास पुरुष के सम्मान से सम्मानित किया।
फिर लगाया विकास में भेदभाव का आरोप
पंचायत द्वारा बड़ौदा गांव से करसिंधू सड़क बनाने की मांग पर बीरेंद्र सिंह ने कहा कि 14 जनवरी को यहां पर बड़ी रैली आयोजित की गई थी।
इसमें सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ केंद्र के स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद, उत्तराखंड के सीएम और हिमाचाल के कई मंत्री पहुंचे थे।
इस दौरान 30 मांगों की सूची सीएम को दी गई थी। इनमें से अब तक एक भी मांग पूरी नहीं हुई, जबकि मांग पत्र को आठ महीने हो चुके हैं।
चौपाल के निर्माण से विकास नहीं होता
बीरेंद्र सिंह ने कहा कि जब हमारे हलके की अनदेखी प्रदेश सरकार द्वारा की जा रही है तो और हलकों में विकास कैसा होता होगा इसका अंदाजा अपने आप लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि विकास का मतलब यह नहीं है कि गांव में गली का निर्माण, चौपाल बनने से विकास नहीं होता बल्कि इलाके के अंदर आर्थिक विकास चाहिए, इसके लिए राजनीतिक लड़ाई जारी रहेगी, जब तक हमें अपना हक नहीं मिलेगा। चाहे कोई सरकार हो उसके खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लोगों के सहयोग से लडूंगा।