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कैन का पानी कर देगा बीमार

Mon, 07 Oct 2013 11:19 PM IST
नारनौल/ब्यूरो
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हरियाणा के जिला महेंद्रगढ़ के नारनौल शहर के आसपास फिल्टर प्लांट लगाकर सप्लाई किया जा रहा कैन का पानी पीने लायक नहीं है।
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इस पानी के लगातार सेवन से व्यक्ति पीलिया, हैजा और टाइफाइड जैसी भयानक बीमारियों का शिकार हो सकता है।

ऐसा नहीं है कि लोगों को इसकी जानकारी नहींहै, लेकिन जानकारी होने के बावजूद उन्हें स्वच्छ पेयजल के अभाव में मजबूरी में कैन का पानी पीना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से गत दिनों शहर में सप्लाई दे रहे फिल्टर प्लांटों के पानी के नमूनों की विभिन्न प्रयोगशालाओं में जांच के दौरान यह बात सामने आई है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कैन द्वारा सप्लाई किए जाने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। इनके पानी में जल जनित बीमारियां के बैक्टीरिया पाए जाते हैं।

इससे पीलिया, हैजा और टाइफाइड जैसी भयानक बीमारियां होती हैं। विभाग ने गत दिनों शहर के आठ वाटर सप्लायर्स में से दो वाटर सप्लायर्स के प्लांटों को सील कर दिया था।
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शहर में कार्यरत वाटर प्लांट संचालक कैन द्वारा शहर में वाटर सप्लाई का कार्य करते हैं। ये दुकानदारों, व्यावसायिक संस्थानों व कुछ घराें में भी वाटर कैनी पहुंचाते हैं।

वाटर सप्लाई करने वालों का दावा है कि वे फिल्टर और चिल्ड वाटर सप्लाई करते हैं, परंतु स्वास्थ्य विभाग की मानें तो यह ॉपानी मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है।

स्वास्थ्य विभाग ने गत दिनों जीण भवानी और एक अन्य वाटर सप्लायर के प्लांटों को सील किया था। जिनके प्लांट कुछ दिन बाद फिर से शुरू हो गए।

विभाग के अनुसार सील किए गए प्लांटों के सैंपल लिए गए थे। रोहतक और अन्य बड़े शहरों में स्थित लैबों में जांच के बाद पाया गया कि इनका पानी मनुष्य के उपयोगी नहीं है।

रोजाना दो हजार कैन सप्लाई
शहर में रोजाना 2000 से 2500 कैन पानी सप्लाई किया जाता है। चारु वाटर सप्लायर के 450, सैनी वाटर सप्लायर के 400, जीण भवानी के 375, दुर्गा वाटर सप्लायर के 300, श्री श्याम वाटर सप्लायर के 325, बालाजी, न्यू बाला जी के 350 और श्याम वाटर सप्लायर 300 कैन सप्लाई देते हैं। इनके अलावा अशोका वाटर सप्लायर का पानी शादी और अन्य पार्टियाें में सप्लाई होता है।

मनुष्य के पीने लायक नहीं
स्वास्थ्य विभाग ने डीसी के आदेश पर बीते दिनों शहर में सप्लाई करने वाले वाटर सप्लायराें के पानी का सैंपल लिया गया था।

रोहतक स्थित बैक्ट्रीयालोजिकल लेबोरेट्री में श्याम इंटरप्राइजेज और न्यू बालाजी वाटर सप्लायर का पानी मानव उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया।

इसके बाद इन प्लांटाें को सील कर दिया गया। इससे पहले भी दो अन्य वाटर सप्लायर के नमूने फेल पाए गए थे। इन प्लांटाें को भी सील कर दिया गया था। अब फिर से उक्त प्लांटों का पानी शहर में सप्लाई हो रहा है।

महीना मांगने का आरोप
वाटर प्लांट संचालकों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी उनसे प्लांट चलाने के नाम पर मंथली मांगते हैं।

उन्हाेंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने उनको पैसे दे दिए, उनके प्लांट सील नहीं हुए और जिन्होंने पैसे नहीं दिए, उनके प्लांट सील कर दिए गए।

स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उच्च अधिकारी का नाम लेकर रुपये तक की मांग करता है।

पानी में मिले बीमारियां फैलाने वाले बैक्टीरिया
सिविल सर्जन डॉ. गुलशन अरोड़ा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर शहर में सप्लाई हो रहे कैन के पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं।
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गत दिनों स्वास्थ्य विभाग ने शहर में कार्यरत वाटर सप्लायराें के पानी के सैंपल लिए थे, जिनमें से दो प्लांटों के सैंपल फेल पाए गए।

उन्होंने बताया कि इनके पानी में जल जनित बीमारियां के बैक्टीरिया मिले। इनसे पीलिया, हैजा और टाइफाइड जैसी भयानक बीमारियां होती हैं इसलिए इन प्लांटों का पानी पीने योग्य नहीं है।

उन्होंने बताया कि सैंपल रोहतक स्थित लेबोरेटरी में भेजते हैं। सैंपल फेल पाए जाने पर प्लांटों को सील किया जाता है।

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