कॉलोनाइजर एरिया की कई रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों ने नगर निगम के प्रॉपर्टी टैक्स का बहिष्कार कर दिया है। गुड़गांव सिटीजन काउंसिल से जुड़े आरडब्ल्यूए ने कहा कि दोहरा टैक्स किसी सूरत में अदा नहीं करेंगे।
काउंसिल के प्रधान आरएस राठी ने कहा कि निगम की ओर से प्राइवेट बिल्डर लाइसेंस एरिया में प्रॉपर्टी टैक्स पूरी तरह से गैर न्यायिक है। नगर निगम की ओर से बार-बार लोगों पर गृह कर भरने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। लोगों पर टैक्स की दोहरी मार पड़ रही है।
एक तरफ लोगों से रखरखाव के नाम पर भारी भरकम शुल्क वसूला जा रहा है, जबकि बिल्डर जो रखरखाव शुल्क वसूल रहे हैं, उसमें भी सुविधाओं के नाम पर खिलवाड़ किया जा रहा है।
ऐसे में निगम द्वारा बिना किसी प्रकार की सुविधाएं देने पर लगातार टैक्स भरने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इसके अलावा गुड़गांव सिटीजन काउंसिल से जुड़े लगभग दर्जन भर आरडब्ल्यूए संगठनों ने हाउस टैक्स का पुरजोर विरोध किया है।
आरडब्लूए संगठनों का मानना है कि जब तक नगर निगम लाइसेंसी क्षेत्र को अपने अधीन न ले, तब तक किसी भी प्रकार का टैक्स लागू नहीं किया जा सकता। आरएस राठी ने बताया कि गुड़गांव सिटीजन काउंसिल द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में स्पेशल लीव पिटीशन दायर की गई, जहां लगभग डेढ़ साल केस चलने के बाद 3 दिसंबर, 2012 को फैसला आया।
इसमें सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय को इस मुद्दे पर फिर सुनवाई करने व बिल्डरों को आईडीसी (आंतरिक विकास कार्य) व हुड्डा को ईडीसी (बाहरी विकास कार्य) समय सीमा (6 माह) में पूरा करने के आदेश दिए गए। ऐसा न होने पर काउंसिल को हाईकोर्ट में अपील करने की पूरी स्वतंत्रता थी।
किसी तरह का काम न कराने पर 6 माह बाद ही जून, 2013 में फिर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी गई। मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर, 2013 को है।