सिद्धपीठ बाबा जहरगिरी आश्रम में शस्त्रों की पूजा करते महंत डॉ. अशोक गिरी महाराज।
भिवानी। विजयादशमी के पावन अवसर पर सिद्धपीठ बाबा जहरगिरि आश्रम में अंतरराष्ट्रीय महंत डॉ. अशोक गिरि महाराज ने विधि-विधान से शस्त्र पूजा की। इस अवसर पर त्रिशूल, तलवार और अन्य पारंपरिक शस्त्रों की पूजा विशेष रूप से की गई।
शस्त्र पूजा शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा का प्रतीक मानी जाती है, और इसे साधु-संतों के द्वारा विशेष महत्व दिया जाता है। महंत डॉ. अशोक गिरि महाराज ने कहा कि त्रिशूल जो शंकर भगवान का प्रमुख शस्त्र है। उन्होंने पूजन करते हुए इसे धर्म और न्याय की स्थापना का प्रतीक बताया। त्रिशूल को बुराई पर विजय पाने, शत्रुओं से रक्षा करने, और आंतरिक शक्ति को जागृत करने का शस्त्र माना जाता है। इसके साथ ही तलवार और अन्य शस्त्रों की पूजा भी की गई, जो धर्म की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए उपयोग किए जाते हैं।
पूजा के दौरान शास्त्रीय मंत्रों का उच्चारण हुआ, और शस्त्रों को फूल, चंदन, धूप, और दीप अर्पित किए गए। साधु-संतों ने इस अवसर पर धर्म की रक्षा, अन्याय के विनाश और सत्य की विजय के लिए संकल्प लिया। महंत डॉ. अशोक गिरि ने अपने प्रवचन में कहा कि शस्त्र पूजा का उद्देश्य केवल बाहरी शत्रुओं से रक्षा करना नहीं है, बल्कि यह आंतरिक बुराइयों, लोभ, क्रोध, और अहंकार पर भी विजय प्राप्त करने का प्रतीक है। उन्होंने साधु-संतों को इस दिन के महत्व और शस्त्रों के सही उपयोग की शिक्षा दी, जिससे समाज में धर्म और न्याय की स्थापना हो सके।