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विश्व ब्रेल दिवस पर विशेष: दृष्टि बाधित फिर भी चलाते हैं फर्राटेदार व्हाट्सअप, फेसबुक, ट्वीटर और कंप्यूटर

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आस्था स्पेशल स्कूल में सामान्य बच्चों के साथ लूडो खेलते दृष्टिबाधित बच्चे। संवाद - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। आमतौर पर हम दिनभर व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्वीटर और कंप्यूटर का इस्तेमाल कर अपने दिमाग और आंख दोनों को ही थका देने की स्थिति में पहुंचा देते हैं। मगर जिन बच्चों की दृष्टिबाधित है, वे बिना देखे ही व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्वीटर और कंप्यूटर बखूबी चलाए तो किसी अजूबे से कम नहीं। ऐसे ही दृष्टिबाधित बच्चों ने न केवल अपने जीवन के अंधियारे को मात दी है, बल्कि उनके जीवन में ज्ञान का उजियारा लाने में आस्था स्पेशल स्कूल संचालक दंपती विजय शर्मा व उनकी पत्नी सुमन शर्मा की अथक मेहनत रंग लाई है।
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भिवानी के सिटी स्टेशन रोड स्थित दिव्यांग बच्चों की निशुल्क शिक्षा एवं पुनर्वास को समर्पित आस्था स्पेशल स्कूल में पढ़ाई करने वाले दृष्टि बाधित बच्चों की दिनचर्या और गतिविधियों को देखने के बाद जरा भी अहसास नहीं होता कि ये दृष्टिहीनता का दंश झेल रहे हैं। ये बच्चे न केवल यहां पढ़ाई में होशियार हैं, बल्कि खेलकूद और सामान्य बच्चों की तरह ही व्यवहार करने में पारंगत हो गए हैं। दृष्टिबाधित 15 वर्षीय शुभम 11वीं कक्षा का छात्र है। 13 साल का भूमित आठवीं में है। जबकि आठ साल की परी तीसरी कक्षा में पढ़ रही है। पांच साल का जतिन अभी पहली कक्षा में है। उसी की कक्षा में पांच साल का कशिश भी पढ़ता है। नौ साल के यश ने भी पहली में इसी साल दाखिला लिया है। ये सभी बच्चे दृष्टि बाधित हैं, मगर स्मार्ट मोबाइल फोन पर इनकी उंगलियां इस तरह दौड़ती हैं, मानो इनकी नजर काफी तेज है।
देहरादून से मंगवाया है सांप-सीढ़ी और लूडो का गेम
दृष्टिबाधित बच्चे सामान्य बच्चों के खेल सांप-सीढ़ी और लूडो की गोटियों को भी खूब दौड़ा रहे हैं, जिन्हें देखकर यह तक अहसास नहीं होता कि बच्चे देख नहीं सकते। ये बच्चे अपनी दिव्यांगता को मात देकर सामान्य बच्चों के समान अपनी प्रतिभा को भी निखार रहे हैं। दृष्टिबाधित बच्चों के लिए देहरादून से सांप-सीढ़ी व लूडो का गेम मंगवाया गया है। गेम में इस्तेमाल होने वाली गोटी व गुटकी खास तौर पर इन बच्चों के लिए ही है।
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साफ्टवेयर ने कर दी मुश्किलें आसान
दृष्टिबाधित बच्चों के लिए स्मार्ट फोन में जावा का एक खास साफ्टवेयर भी तैयार किया है। गुगल टेक्स्ट स्पीच को डाउनलोड करने के बाद मोबाइल की एक्सेस एबिलिटी में टॉक बैन ऑन कर करनी होती है। इसे डाउनलोड करने के बाद दृष्टि बाधित बच्चे भी फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्वीटर और गुगल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इन बच्चों को तकनीक के साथ भी जोड़ा जा रहा है, क्योंकि समय के साथ ये बच्चे सामान्य बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा में भी किसी भी मायने में कम नहीं रहेंगे। वहीं कंप्यूटर के लिए जॉर्ज सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है।
विद्यालय में इस समय कक्षा पहली से बारहवीं तक 65 दिव्यांग बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें छह दृष्टिबाधित बच्चे ऐसे हैं, जो सामान्य बच्चों की तरह ही व्यवहार करते हैं। इन बच्चों की सामान्य बच्चों के साथ भी लूडो खेल प्रतियोगिताएं भी कराई जाती हैं, ताकि ये समाज की मुख्यधारा के साथ जुड़कर भविष्य में आगे बढ़ सकें।
- सुमन शर्मा, प्राचार्या एवं संचालिका, आस्था स्पेशल स्कूल भिवानी।
इस जुनून में मेरी नानी की पीड़ा भी छुपी थी, जो दृष्टिहीन थी। नानी को देखकर ही मैंने ऐसे बच्चों के लिए कुछ करने की ठानी थी। इसी उद्देश्य से दिव्यांग बच्चों की शिक्षा और पुनर्वास के लिए निशुल्क आस्था स्पेशल स्कूल की नींव 2015 में पड़ी। अब इस विद्यालय में ये बच्चे अपनी दिव्यांगता की बाधा को पार कर समाज में सामान्य बच्चों की तरह ही अपने जीवन में लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
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- विजय शर्मा, संस्थापक, आस्था स्पेशल स्कूल भिवानी।
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