भिवानी। साहब, दो दिन से खाना नहीं खाया है, हिसार से पैदल चलकर आए हैं और दिल्ली जा रहे हैं। वहां से यूपी जाएंगे। यह कहना है भरी दोपहर में करीब डेढ़ बजे भिवानी-दिल्ली मुख्य मार्ग पर पैदल ही सामान सिर पर उठाए जा रहे प्रवासी मजदूर रामदीन के परिवार का। रामदीन के अलावा परिवार के सदस्य विवेक, संजय भी थे। महम रोड आश्रम से भी काफी मजदूर पैदल ही रवाना हुए। वहीं कुछ ने व्यवस्था नहीं होने पर रोष भी जताया। मजदूरों की हालत देख हर कोई आज की व्यवस्था के बारे में सोचने पर मजबूर हो रहा है।
मंगलवार दोपहर करीब 65 किलोमीटर का सफर तय कर यूपी के प्रवासी मजदूर भिवानी पहुंचे। मजदूर रामदीन, विवेक, संजय ने बताया कि वे हिसार से आ रहे हैं। दो दिन से खाना नहीं खाया। थोड़ा बहुत जो हिसार में मिला था वहीं खाया। मजदूरों ने बताया कि रजिस्ट्रेशन करवाये दो सप्ताह से ज्यादा समय बीत चुका है, मगर घर जाने की कोई व्यवस्था नहीं हुई। यहां हम टेंशन में है और वहां परिवार के सदस्य चिंतित है। इसी कारण पैदल ही घर जा रहे हैं।
साहब क्या करें, कितना इंतजार करें
महम रोड स्थित आश्रम से भी मंगलवार को कुछ प्रवासी मजदूर पैदल ही यूपी के लिए निकल पड़े। प्रवासी मजदूर परिवार में महिलाएं भी थी। दोपहर में परिवार को सड़क किनारे पेड़ की छांव में आराम करते देखा गया। प्रवासी मजदूर परिवार ने बताया कि पिछले 12-13 दिन से हर रोज एक ही बात कही जा रही है कि आज-कल में तुम्हारे जाने की व्यवस्था कर दी जाएगी। अब कितना इंतजार करें।
बिहार, उत्तराखंड, झारखंड, यूपी के फंसे हैं प्रवासी मजदूर
भिवानी और चरखी दादरी से भले ही ही करीब आठ हजार से अधिक मजदूरों को उनके घर भेजा जा चुका हो मगर अभी भी दो हजार से अधिक प्रवासी मजदूर घर जाने का इंतजार कर रहे हैं। इनमें ज्यादातर बिहार से हैं। बिहार के विभिन्न जिलों के करीब 1200 प्रवासी मजदूर अभी भी यहां हैं जबकि इतने ही मजदूर उत्तराखंड, झारखंड, यूपी, एमपी के हैं। हालांकि काफी बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने घरों को चले गए है।
नियमानुसार व्यवस्था होते ही प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजा जा रहा है। अब हम यहां से भेज दे रहे और वहां दूसरे राज्यों की सीमाओं में इन्हें प्रवेश न करने दिया जाए। इसके लिए पहले दूसरे राज्यों से प्रवेश की अनुमति ली जाती है, उसी अनुसार मजदूर भेजे जाते हैं। सबका रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है और सबको भेजा जाएगा। यहां प्रवासी मजदूरों के ठहरने और खाने-पीने की उचित व्यवस्था की हुई है। - वीरेंद्र सिंह, डीएसपी हेड क्वार्टर