स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने 250 शौचालयों के निर्माण में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। इन शौचालयों का ठेका किसने दिया किसी को पता नहीं है। इसका खुलासा आरटीआई से मांगी गई जानकारी में हुआ है। एक ओर जहां नगर परिषद उक्त शौचालय बनवाने की बात से इनकार कर रही है। वहीं अपने आपको सरकारी ठेकेदार बताने वाला शख्स 15-15 हजार रुपये मकान मालिकों से वसूल कर फुर्र हो चुका है। मामला उठने के बाद अब नगर परिषद ठेकेदार को ढूंढ रही है।
आईएचएचएल योजना के तहत करीब दो साल पहले 250 घरों में शौचालय बनाए गए हैं। स्कीम के तहत सरकार 14 हजार रुपये की अनुदान राशि भी दो किस्तों में देगी। शौचालय चयन होने के बाद निर्माण के लिए कुछ लोग अपने आपको को ठेकेदार के कर्मी बता शौचालयों का निर्माण किया। निर्माण के बदले राशि ली और चले गए। आवेदकों को लगा कि नगर परिषद ने ठेका देकर निर्माण करवाया जबकि नगर परिषद ने कोई ठेका ही नहीं दिया। अब इसकी आरटीआई से जानकारी मांगी गई है कि ठेकेदार कौन था और किसने ठेका दिया। आरटीआई में भी आवेदक को कोई जवाब नहीं दिया गया है।
आरटीआई एक्टिविस्ट बिशंबर ने बताया कि ठेकेदार के कारिंदे शौचालय निर्माण करके गए हैं तो कम से कम ये बताया जाए कि ठेका दिया किसने था और ठेकेदार कौन था। निर्माण में भी निम्नस्तर की सामग्री का प्रयोग किया गया है। आरटीआई लगाई तो जवाब भी नहीं दिया जा रहा है।
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शौचालयों के निर्माण के लिए नगर परिषद ने किसी को कोई ठेका नहीं दिया। लोगों ने अपने स्तर पर शौचालयों का निर्माण कराया है। अगर कोई नगर परिषद का ठेकेदार बताकर शौचालय बनाकर गया है तो यह गलत है। नगर परिषद लाभार्थी के बैंक अकाउंट में ही राशि जमा कराती है।-हरदीप सिंह, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
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दो साल से सरकारी राशि मिलने का इंतजार
भिवानी।
शासन-प्रशासन की हीलाहवाली की वजह से स्वच्छता अभियान उन लोगों के लिए किरकिरी बन गया, जिन्होंने आईएचएचएल स्कीम के तहत 250 मकानों में शौचालय बनवाए। ठेकेदार के कारिंदे अपनी पेमेंट भी ले गए लेकिन मकान मालिक दो साल से भुगतान के लिए चक्कर लगा रहे हैं।
करीब दो साल पहले आईएचएचएल स्कीम शुरू की गई थी। स्कीम के तहत शहर के उन घरों में शौचालय बनाये जाने थे, जहां शौचालय नहीं है। इसके लिए परिवारों को 14 हजार रुपये की अनुदान राशि भी दो किस्तों में दी जानी थी। स्कीम के तहत शहर में 815 लोगों ने आवेदन किया। सर्वे में 732 आवेदनों को शौचालय बनाने के लिए सही पाया गया। प्रथम चरण में करीब 250 शौचालय बनाने की प्लानिंग बनाई। 250 परिवारों को शौचालय बनाने के लिए पहली किस्त सात-सात हजार रुपये की किस्त दे दी गई। दो साल बीतने वाले हैं लेकिन दूसरी किस्त अभी तक नहीं लोगों को मिल पाया है। नप ने शौचालय बनाए गए या नहीं इस बाबत सर्वे भी करवाया। सर्वे में साफ हुआ कि अधिकतर घरों में शौचालय बने हुए हैं।
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शौचालय ने बना दिया कर्जदार
योजना के तहत शौचालय बनवाने वाली हनुमान गेट वासी महिला बिमला ने बताया कि 14 हजार रुपये देने की बात कही थी। पहली किस्त सात हजार की मिली मगर दूसरी किस्त अब तक नहीं मिली है। घर पर अधिकारी पूछने भी आए थे तो शौचालय दिखा दिया था। उन्होंने बताया कि मिस्त्री, मजदूरों, सामान का भुगतान करने के लिए कर्जा लिया था।
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