भिवानी। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर चिकित्सकों ने युवाओं में बढ़ते तंबाकू सेवन पर चिंता जताई है। भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और अकेलेपन से बचने के लिए बड़ी संख्या में युवा हुक्का, सिगरेट, बीड़ी और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन कर रहे हैं जिसका उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। शहरों से लेकर गांवों तक दुकानों और चाय की टपरियों पर तंबाकू उत्पाद खुलेआम बिक रहे हैं। शैक्षणिक संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में भी तंबाकू आसानी से उपलब्ध हो रहा है।
एक ओर सरकार लोगों को तंबाकू से दूर रहने की सलाह दे रही है वहीं दूसरी ओर शहर में खुलेआम तंबाकू की बिक्री जारी है। कुछ दुकानदार मामूली मुनाफे के लालच में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को भी सिगरेट और तंबाकू उत्पाद बेच रहे हैं। युवावस्था में शुरू होने वाली यह आदत आगे चलकर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन रही है।
पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. यतिन गुप्ता ने बताया कि तंबाकू का सेवन निश्चित रूप से स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इसका अधिक उपयोग मानव शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। तंबाकू के सेवन से सांस फूलने की समस्या बढ़ती है और फेफड़े कमजोर होते हैं। इसके अलावा यह हृदय, मस्तिष्क, रक्त वाहिकाओं, मुंह, गले, पेट और शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करता है।
उन्होंने बताया कि लंबे समय तक धूम्रपान करने वाले लोगों में कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), सांस लेने में परेशानी और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। तंबाकू की लत व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से जकड़ लेती है।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है ताकि लोग तंबाकू से होने वाले नुकसान को समझें और इस नशे से दूर रहें। उन्होंने विशेष रूप से सांस संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों और बुजुर्गों को तंबाकू का प्रयोग न करने या कम से कम करने की सलाह दी।
ऐसे करें बचाव
डॉ. गुप्ता ने बताया कि तंबाकू से दूर रहने के लिए स्वयं को व्यस्त रखें। नियमित रूप से योग और व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। पौष्टिक आहार का सेवन करें तथा तंबाकू युक्त खाद्य पदार्थों और अन्य उत्पादों के इस्तेमाल से दूरी बनाए रखें।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस क्यों और कब से मनाया जाता है
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वर्ष 1987 में तंबाकू सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाने की शुरुआत की थी। इसके बाद से प्रत्येक वर्ष 31 मई को यह दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य तंबाकू सेवन से होने वाली बीमारियों, मौतों और सामाजिक-आर्थिक नुकसान के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा तंबाकू मुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।