ढिगावा मंडी (भिवानी)। क्षेत्र के गांव कुड़ल में कॉलेज की घोषणा होते ही छात्राओं के साथ-साथ ग्रामीणों में भी खुशी की लहर है। जैसे ही ग्रामीणों को इसकी खबर मिली उनकी खुशी का ठिगाना नहीं रहा। गांव के चौक में सूचना मिलते ही ग्रामीण इकट्ठे हुए और एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियां बांटी।
सरपंच प्रतिनिधि और बीजेपी नेता रामकिशन शर्मा ने बताया कि पिछले सात साल से भाजपा की सरकार बनते ही उनके प्रतिनिधित्व में कॉलेज की मांग शुरू हो गई थी। इसके लिए 45 स्कूलों के प्राचार्यों और बच्चों के साथ 40 गांव की पंचायतों की तरफ से मांग भेजी गई। शर्मा ने कहा कि प्रशासन चाहे तो जून से कक्षाएं लगा सकता है। गांव ने 27 एकड़ में ग्रामीणों की सहयोग से बने सीनियर सेकेंडरी स्कूल की बिजली पानी से सुसज्जित 17 कमरे और बरामदों की बिल्डिंग का प्रस्ताव सरकार को भेज रखा है।
मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा क्षेत्र की बेटियों के लिए वरदान से कम नहीं है। दूरी और ट्रांसपोर्ट की वजह से दूर दराज पड़ने वाले कॉलेज में न जा सकने वाली पढ़ाई से वंचित रहने वाली छात्राएं भी अब शिक्षा हासिल कर सकेंगी। इस अवसर पर सुरेश चोपड़ा, मास्टर बलबीर, रविंद्र शर्मा, सुरेश काला, रामबिलास जांगड़ा, सुरेंद्र हलवाई, धनसिंह प्रजापत, गोविंद शर्मा, जोगिंद्र, ओमवीर, दिनेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
इन गांव को होगा फायदा
कुड़ल में कॉलेज खुलने से बड़दू चैना, बड़दू धिरजा, बड़दू जोगी, बड़दू पूर्ण, बड़दू मुगल, बड़दू नई, अमीरवास, बुढेडा, मनफरा, खरखड़ी, ढिगावा जाटान, ढिगावा शामियान, कारी, कुड़ल, कुड़ल बास, भुंगला, ढाणी लक्ष्मण, पोहकरवास, लालावास, ढाबढाणी, बिजलानाबास, द्वारका, डाडमा, जुई बिचली, जुई खुर्द, जुई कलां, खोरड़ा आदि गांवों की छात्राओं को फायदा होगा।
यह बोले क्षेत्रवासी
गांव की बेटियों को रोज बस स्टैंड पर घंटों बस के इंतजार में खड़ी देखता था और भीड़ में बस में लटक कर सफर करती बेटियों देखकर मन दुखी होता था। पिछले सात साल से गांव और आस पड़ोस के ग्रामीणों की मांग थी। अब बेटियों को दूर जाने की ओर परिजनों को खुद से बेटी को दूर भेजने दोनों की चिंता खत्म होगी। सरकार का महिला दिवस पर यह फैसला अतुलनीय है।
- रामकिशन शर्मा, सरपंच प्रतिनिधि।
स्कूल के बाद सोच रही थी कहां और किस कॉलेज में एडमिशन होगा। अब गांव में ही कॉलेज खुलने से दूर जाने की टेंशन नहीं होगी। इससे समय भी बचेगा और मां बाप के नजदीक भी रह पाऊंगी।
- खुशी, छात्रा, निवासी कुड़ल।
आसपास कोई कॉलेज न होने और रोजाना बसों के इंतजार और भीड़ भरे सफर के डर से पापा को मेरा एडमिशन हिसार करवाना पड़ा। मैं बीएससी के दूसरे वर्ष की छात्रा हूं। अगर पहले यह सुविधा मिली होती तो इतनी दूर परिजनों को छोड़कर न जाना पड़ता। धन्यवाद दूसरी बहनों को अब दूर नहीं भटकना पड़ेगा
-ज्योति, छात्रा निवासी, बड़दू।
रोजाना आने जाने की टेंशन और परेशानी की मैं और मेरी फ्रेंड्स आदी हो चुकी हैं। बसों का घंटों इंतजार करना और भीड़भाड़ भरा रोजाना का सफर देखकर सोचती थी काश हमारे नजदीक भी कोई कॉलेज होता। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सरकार के इस फैसले पर दिल को सुकून मिला है।
-निकिता गोयल, निवासी ढिगावा जाटान।
माता-पिता स्कूल के बाद सोचते थे बेटी को बाहर भेजना पड़ेगा। लड़कियों के लिए रोजाना यात्रा करके दूर पढ़ने जाना मां-बाप के लिए चिंता और परेशानी का कारण बन जाते हैं। कॉलेज खुलने से अब ज्यादा संख्या में लड़कियां पढ़ पाएंगी।
-रश्मि, छात्रा।