भिवानी। साहब मैं कई दिनों से चक्कर लगा रहा हूं, पीआईडी (प्रॉपर्टी आईडी) में मेरे बेटे को ही मेरा बाप बना दिया है, अब इस त्रुटि को ठीक कराने के लिए भी नप कार्यालय के चक्कर लगा रहा हूं। पांच माह से पीएमएसडॉटहरियाणा का पोर्टल भी बंद पड़ा है। इसकी वजह से प्रॉपर्टी की सर्वे रिपोर्ट भी नहीं निकल रही है। संवाददाता की पड़ताल इस तरह के कई मामले आए, जिनमें लोग पीआईडी बनवाने या फिर गलतियों को ठीक कराने के लिए ही महीनों से चक्कर लगा रहे हैं। अचरज तो इस बात का भी है कि नगर परिषद के पास भूमि संबंधी मामलों की जांच के लिए कोई एक्सपर्ट अधिकारी तक नहीं हैं, जिसकी वजह से खसरा नंबर को लेकर भी पीआईडी बनवाने में कई पेंच फंस रहे हैं।
भिवानी शहर में याशी कंपनी ने 2017 में शहर के 31 वार्डों में प्रॉपर्टी का सर्वेक्षण शुरू किया था। कंपनी ने 2018 में सर्वे की रिपोर्ट जमा कर दी थी। इसके बाद शहरी दायरे में करीब 77 हजार से अधिक लोगों की प्रॉपर्टी की पहचान की गई थी। प्रॉपर्टी से जुड़ा डॉटा भी पीएमएसडॉट हरियाणा पोर्टल पर ऑनलाइन किया गया। अब पीआईडी बनवाने के लिए याशी कंपनी के सर्वे की रिपोर्ट भी ऑनलाइन पोर्टल से निकालनी होती है, मगर पिछले पांच माह से पोर्टल ही बंद पड़ा है। पोर्टल से रिपोर्ट निकलवाने के लिए रोजाना ही नप में करीब 25 से 30 लोग चक्कर लगा रहे हैं।
अलग-अलग खसरा नंबर हो तो फंस जाता है पेंच
नगर परिषद के पास भूमि के रिकॉर्ड की जांच से जुड़े मसलों को सुलझाने के लिए बिल्डिंग इंस्पेक्टर, लैंड ऑफिसर और पटवारी तक नहीं हैं। इससे भी पीआईडी बनवाने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। उदाहरण के तौर पर अगर एक भूमि की रजिस्ट्री में चार हिस्सेदार हैं और भूमि का अलग-अलग खसरा नंबर है, तो पीआईडी बनवाने में पेंच फसेगा ही फसेगा, क्योंकि एक खसरा वैध बताया जाता है तो उसी भूमि के तीन हिस्से अनाधिकृत दायरे में दर्शाये जा रहे हैं। भूमि के रिकॉर्ड की जांच का कोई विशेषज्ञ नहीं होने की वजह से कार्यालय में बैठे बाबू भी पीआईडी के कार्यों को टरका रहे हैं।
नप में नहीं कोई हेल्प डेस्क
नगर परिषद में पीआईडी के मामलों का निपटान करने व लोगों को सही सलाह एवं दस्तावेजों संबंधी जानकारी देने के लिए कोई हेल्प डेस्क तक नहीं है। इस वजह से भी लोग सही जानकारी व दस्तावेजों के संबंध में अनिवार्यता को लेकर इधर उधर भटक रहे हैं।
पीआईडी के लिए इन अधिकारियों की रिपोर्ट जरूरी
- गृहकर शाखा के लिपिक की रिपोर्ट
- कर अधीक्षक की रिपोर्ट
- सफाई निरीक्षक की रिपोर्ट
- कनिष्ठ अभियंता की रिपोर्ट
- पालिका अभियंता की रिपोर्ट
- कार्यकारी अभियंता की रिपोर्ट
पीआईडी में बेटे को दिखाया पिता का बाप
वार्ड नंबर दस की बैंक कॉलोनी में नया बस स्टैंड के सामने मेरा मकान है। नगर परिषद ने मेरी पीआईडी तो बना दी है, मगर उसमें मेरे बेटे को ही मेरा बाप बना दिया है। इस गलती को ठीक कराने के लिए मैं खुद फाइल लेकर कई दिनों से चक्कर काट रहा हूं, मगर यहां बैठे कर्मचारी ठीक से कोई जवाब भी नहीं दे रहे हैं। मेरा नाम रिकार्ड अनुसार विजयंत परमार है, मगर पीआईडी में मेरे बेटे विश्वजीत को मेरा पिता दर्शाया हुआ है। जबकि वास्तव में वह मेरा बेटा है।
-विजयंत परमार बैंक कॉलोनीवासी।
बाबू ठीक से जवाब नहीं देते, अफसर कार्यालय में मौजूद नहीं रहते
मेरा मकान कीर्तिनगर कॉलोनी में है। पीआईडी बनवाने के लिए पिछले कई महीनों से नगर परिषद कार्यालय के चक्कर लगा रहा हूं। सभी दस्तावेज पूरे हैं, मगर फिर भी मुझसे बेवजह चक्कर कटाए जा रहे हैं। बाबू ठीक से जवाब नहीं देते, अफसर कार्यालय में मौजूद नहीं रहते। अब आम आदमी जाए तो जाए कहां।
-उमेश शर्मा, कीर्तिनगर कॉलोनी वासी।
नगर परिषद के अधिकृत दायरे में आने वाले क्षेत्र की पीआईडी बनाई जा रही है। भूमि के खसरा नंबरों की पड़ताल का काम राजस्व विभाग का है। अगर पीआईडी बनवाने वाले के सभी दस्तावेज पूरे हैं तो उसे पीआईडी जारी की जाएगी। फिलहाल सरकार ने पीएमएस पोर्टल बंद किया हुआ है।
- संजय यादव, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद भिवानी।