भिवानी। देश में जब खेल के प्रति लोगों का खास रुझान नहीं था, तब भिवानी की माटी का लाल एथलीटों की खेती कर रहा था। अब उस बाग का माली भले ही न रहा हो लेकिन उसकी लगाई बगिया में पदकों के तिरंगी पुष्प खिल रहे हैं। 1946 में शुरू हुई दिनोद रोड स्थित सरजीत सिंह मेमोरियल खेल अकादमी के खिलाड़ी अब तक 400 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के पदक जीत चुके हैं और अब भी पदकों की झड़ी लगा रहे हैं। सरजीत सिंह तंवर ने इस अकादमी की शुरुआत वैश्य सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पीटीआई के पद पर रहते हुए की थी। उनकी जीवटता और एकाग्रता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 56 साल तक सेवा और कई बड़े खिलाड़ी निकलने के बावजूद उन्होंने खुद को प्रशिक्षण तक ही सीमित रखा। अब करीब दो साल पहले इस अकादमी का पंजीकरण कराया गया है।
सरजीत सिंह ने ही इस क्षेत्र के लोगों को खेलों के प्रति जागरूक किया और खेल मैदान तक लेकर आए। सरजीत सिंह ने उस समय में अनेक राष्ट्रीय व अंतर राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी के तैयार किए थे। इनमें फूल कुमार, राजेंद्र सिंह, सुंदर सिंह ( पोलवाल्ट) ओमपाल सिंह (जैवलिन थ्रो) सुगन सिंह (डिस्कस थ्रो ) उमेद सिंह, जसवंत सिंह, धर्मपाल सिंह, रामबीर सिंह (कूद) रामपाल सिंह (दौड़) के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाने वाले खिलाड़ी थे। ऐसे ही बहुत से खिलाड़ी है जो उस समय में इस खेल अकादमी से निकले हैं। खेल अकादमी में अंतिम सांस तक 85 वर्ष की अवस्था में भी उन्होंने खिलाड़ियों को तैयार किया। उनके नाम का दिल्ली में परिवार मैत्रीसंघ द्वारा प्रतिवर्ष एक पुरस्कार दिया जाता है। वर्तमान में अकादमी के कोच विक्रम सिंह मौगली ने बताया के अकादमी में 50 खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। इनमें 12 लड़कियां भी अभ्यास करती हैं। अकादमी का समय शाम को पांच बजे से सात बजे है। अकादमी में खिलाड़ियों को निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। अकादमी में बुजुर्ग खिलाड़ी भी खेलों का अभ्यास करने आते हैं।
इन खिलाड़ियों ने भिवानी में दिलाई एथलीट को पहचान
- फूल कुमार रिटायर्ड सीटीआई ने 1980 में ओपन नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप हिसार में पोल वॉल्ट में प्रथम स्थान प्राप्त किया। 1980 में पाकिस्तान में अंतर राष्ट्रीय एथलेटिक्स मिट पोलवाल्ट में दूसरा स्थान प्राप्त किया था।
- उमेद सिंह पंवार रिटायर्ड कमांडेंट सीआरपीएफ ने ऑल इंंडिया ओपन मीट 1984 में 800 दौड़ में प्रथम स्थान के साथ रिकॉर्ड कायम किया था। इंटर स्टेट एथलेटिक्स मीट 400 मीटर में प्रथम स्थान।
- जगजीत सिंह जूनियर इनविटेशन एशियन एथलेटिक्स मलेशिया में सिल्वर पदक प्राप्त किया। 2001 में वर्ल्ड रेलवे एथलेटिक्स मीट कुर्कोवा पोलैंड में कांस्य पदक प्राप्त किया।
- सुंदर तंवर भीम अवाॅर्डी एनआईएस कोच ने 1981 में लखनऊ में हुई। ओपन नेशनल एथलेटिक्स मीट पोल वॉल्ट में स्वर्ण पदक प्राप्त किया था। 1983 में पांचवीं एशियन एथलेटिक्स मीट कुवैत 1983 में कांस्य में पदक जीता। अंतर राष्ट्रीय एथलेटिक्स मीट में नई दिल्ली 1987 में सिल्वर पदक प्राप्त किया।
- सुरेश कुमार ने ओपन नेशनल 2010 में कांस्य पदक प्राप्त किया। 2008 ऑल इंडिया इंटर युनिवर्सिटी में सिल्वर पदक प्राप्त किया था।
- अमरजीत सिंह ने 1976 में ऑल इंडिया इंटर स्टेट पोल वॉल्ट में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
- जयवीर सिंह ने 1984 में सीनियर पुरुष इंडिया इंटर युनिवर्सिटी एथलेटिक्स मीट नई दिल्ली में जेवलिन थ्रो में प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
- 1984 व 85 में जसवंत सिंह चौहान देवसर ने पोल वॉल्ट में नेशनल में गोल्ड मेडल जीता था।
- रमेश तंवर ने 40वीं स्कूल गेम्स में रोहतक में एथलेटिक्स में प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
- रामबीर सिंह ने चौहान सीटीआई रेलवे ने 1994 में वर्ल्ड रेलवे एथलेटिक्स मिट में इंग्लैंड में ट्रिपल जंप में स्वर्ण पदक जीता था।
- पूजा यादव देवसर हरियाणा पुलिस ऑल इंडिया 2023 में कांस्य पदक प्राप्त किया।
- मास्टर बालकिशन ने राष्ट्रीय मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक प्राप्त किया।
- फूल कुमार ने राष्ट्रीय मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पोल वॉल्ट में रिकाॅर्ड बनाया है।
- ज्योति व सत्यम ने बिहार में हुए स्कूल नेशनल गेम्स में 2024 में भाग लिया।
- हर्ष ने एथलेटिक्स 2023-24 स्टेट में दूसरी स्थान पाया।
- तरुण चौहान नरवाना, जींद 2024 में ट्रिपल जंप में प्रथम स्थान पाया व जूनियर नेशनल कोयम्बटूर 2023 में प्रथम स्थान प्राप्त किया
- कार्तिक ने अंडर 11 स्कूल स्टेट 2023 में भाग लिया है।
- नकुल व पार्स ने जूनियर खेलों में भाग लिया है।
- विवेक ने जूनियर स्टेट 2022 में भाग लिया।
अकादमी में खिलाड़ियों के लिए उपकरणों की कमी है। सरकार से भी उपकरणों की मांग रखी गई है। अकादमी का स्वर्णिम इतिहास रहा है। अकादमी में राष्ट्रीय व अंतर राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं।
-विक्रम सिंह मौगली, अकादमी कोच।
उमेद सिंह ने किया कड़ी चुनौतियों का सामना
ऑल इंंडिया ओपन मीट 1984 में 800 दौड़ में प्रथम स्थान हासिल करने वाले सांगा निवासी एथलीट उमेद सिंह ने बताया कि उसने खेल के शुरुआती दौर में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। गांव में कोई खेल मैदान नहीं था, इसलिए करीब दस किलोमीटर दूर से रोजाना खेल अभ्यास के लिए शहर आना पड़ता था। अकादमी में आने के बाद उनके खेल में निखार आया।