उन्होंने बताया कि धनतेरस पर ग्रहों का बहुत ही दुर्लभ संयोग 59 साल बाद बन रहा है। दरअसल, इस बार धनतेरस पर शनि अपनी राशि कुंभ में 30 साल बाद रहेंगे। वहीं, शुक्र कन्या राशि में और गुरु मेष राशि में और सूर्य तुला राशि में रहेगा। ग्रहों की ऐसी स्थिति 59 साल बाद बनी है। इस दौरान गुरु मेष राशि में बैठकर अपनी सप्तम दृष्टि से सूर्य को देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि में बैठकर शश राजयोग का निर्माण कर रहे हैं। शुक्र अपनी मित्र राशि कन्या में विराजमान हैं और दोनों हाथों से धन लुटा रहे हैं।
शास्त्री ने बताया कि धनतेरस हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। धनतेरस दस नवम्बर को है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे। उस समय उनके हाथ में अमृत कलश भी था। पंडित श्रीकांत शास्त्री के मुताबिक कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 10 नवंबर को दोपहर 12.35 बजे होगा। यह तिथि 11 नवंबर को दोपहर 1.57 बजे समाप्त होगी। धनतेरस की तिथि पर पूजा का सही समय शाम 5 बजकर 47 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक है। आप इस अवधि के दौरान पूजा-पाठ कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि धनतेरस की तिथि पर प्रीति योग बन रहा है। यह योग शाम 05:06 बजे के बाद बन रहा है। यह योग पूरी रात रहेगा। इस योग में पूजा करने से साधक को अनंत फल की प्राप्ति होगी। यह अवधि खरीदारी के लिए भी अच्छी है।
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