भिवानी। खेल जगत में हरियाणा की विशेष पहचान है। टोक्यो ओलंपिक में भी प्रदेश से 30 खिलाड़ियों ने देश का प्रतिनिधित्व किया था। आधे से ज्यादा पदक हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते। देश को महज एक स्वर्ण पदक मिला है, वह भी हरियाणा के खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने दिलाया है। ऐसे में प्रदेश में खेल को अधिक बढ़ावा देने के लिए सरकार स्कूल के बच्चों पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए तीसरी कक्षा से ही विद्यार्थियों को खेलों की तैयारी कराने की योजना मनाई जा रही है।
शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों और सहायक शिक्षा अधिकारियों को नए प्रारूप पर मंथन करते हुए विभिन्न सुझावों पर काम करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत आने वाले समय में कुछ कदम उठाए जाने पर विचारविमर्श चल रहा है। भिवानी जिले से जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने सुझाव मुख्यालय को भेज दिए हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी अजीत श्योराण ने बताया कि देश में ओलंपिक में पदकों की संख्या बढ़ाने के लिए तीसरी कक्षा से ही बच्चे का खेल पर ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत तीसरी कक्षा में बच्चे को योग, व्यायाम सहित शारीरिक रूप से उसे मजबूत बनाया जाएगा। उसके बाद चौथी कक्षा में उसके पसंद के खेल सहित अन्य खेलों का प्रदर्शन करवाया जाएगा। जिस खेल में उसका बेहतर प्रदर्शन होगा, उसी खेल की तैयारी करवाई जाएगी। ऐसे में खिलाड़ी के वयस्क होने तक वह खेल में निपुण हो जाएगा और वह खेल में बेहतर प्रदर्शन कर पाएगा।
क्लस्टर स्तर पर बनेगा स्पोर्ट्स स्कूूल, हर ब्लॉक पर बनेगा होस्टल
भिवानी जिले में कुल 749 स्कूल हैं, इन स्कूलों में 78 क्लस्टर हैं। जिनमें औसतन आठ से दस स्कूलों पर एक क्लस्टर बनाया हुआ है। विभाग की योजना है कि हर क्लस्टर स्तर पर मॉडल संस्कृति स्कूलों की तर्ज पर स्पोर्ट्स स्कूल बनाए जाएंगे। साथ ही खिलाड़ियों को तैयारी करने के लिए बढ़िया सुविधा मिले, इसके लिए हर खंड पर एक होस्टल भी बनाए जाने की योजना की है। साथ ही इसमें क्षेत्र की भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। (संवाद)
मुख्यालय को ये सुझाव भेजे
- खिलाड़ियों में भाई भतीजावाद खत्म किया जाए।
- खेलों में धोखाधड़ी को पूरी तरह से नियंत्रित करने के लिए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश।
- कैच द चाइल्ड मुहिम के तहत खेलते हुए बच्चों की निगरानी करके उनकी पसंद के खेल के लिए उन्हें चिह्नित करना।
- प्रत्येक मंडल व ब्लॉक में विशेष सुविधाओं वाला एक आवासीय विद्यालय खोलना।
- स्कूलों में डीपीई व पीटीआई की भूमिका व जिम्मेदारी नए सिरे से परिभाषित करना, ताकि भावी खिलाड़ियों की अच्छे से तराशा जा सके।
- हर स्कूल में हर साल खेल दिवस को आवश्यक रूप से मनाया जाए।
- 300 या ज्यादा विद्यार्थियों वाले स्कूल में एक या दो खेल टीमें अनिवार्य रूप से बनाना।
- शारीरिक शिक्षकों व किसी विशेष खेल में दिलचस्पी लेने वाले अन्य शिक्षकों का एक ग्रुप बनाना जो अन्य स्कूलों में भी अपनी सेवाएं देंगे।
- विभिन्न स्कूलों में चल रही खेल नर्सरियों की जवाबदेही तय करना, ताकि खिलाड़ियों का प्रदर्शन सुधर सके।
- खंड व जिला स्तर पर खिलाड़ियों को खेल किट व अन्य प्रोत्साहन देना।
- शारीरिक शिक्षा के लिए व्यवसायिक परीक्षा खेल मैदान में लेना।
- प्राथमिक स्तर पर शारीरिक शिक्षा विषय शुरू करना।
- इसके अलावा ओलंपिक पदक विजेताओं की कहानी पाठ्यक्रम में शामिल करना।
सुझाव भेज दिए हैं
शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की ओर से स्कूल खेल नीति को लेकर सुझाव और लक्ष्य मांगे गए थे। इसके लिए जिले की ओर से सुझाव भेजे जा चुके हैं। ओलंपिक खेलों में पदकों की संख्या बढ़ाने के लिए तीसरी कक्षा से ही बच्चों को खेल में भेजना होगा। खंड और क्लस्टर स्तर पर विशेष व्यवस्था किए जाने की योजना है।
- अजीत श्योराण, जिला शिक्षा अधिकारी, भिवानी।
स्कूल के खिलाड़ियों पर करना होगा फोकस
ओलंपिक खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए स्कूल से ही खिलाड़ियों पर फोकस करना होगा। इसके लिए खिलाड़ियों की मुफ्त में तैयारी करवानी चाहिए। साथ ही खिलाड़ी का खेल में ध्यान दिलाने के लिए उसे पढ़ाई में भी कुछ छूट दी जानी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र में अगर खिलाड़ियों को सुविधा दी जाए तो देश में मेडल ही मेडल होंगे।
- विनोद पिंकू, महासचिव, हरियाणा शारीरिक शिक्षा अध्यापक संघ।