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गरीबों के सिर पर नहीं छत, किस्त भुगतान के लिए एडीसी कार्यालय में धूल फांक रहीं 800 फाइलें

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पीएमएवाई के तहत मकान की छत के इंतजार में पात्र परिवार। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : Bhiwani
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साहब बारिश में सिर पर छत नहीं है, बीवी बच्चों को कहां लेकर जाऊं। आपकी मेहरबानी से किस्त का भुगतान हो जाए तो गरीब के सिर पर भी छत आ जाएगी। ये फरियाद लेकर इन दिनों सैकड़ों गरीब रोजाना ही नगर परिषद कार्यालय में चक्कर लगा रहे हैं। सिर्फ इतना ही नहीं नगर परिषद के तहत आने वाले कई कार्य जो शहर के विकास के लिए जरूरी हैं, अटके पड़े हैं और लोग फरियाद लेकर अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। ऐसा लगता है कि कोरोना संक्रमण का सबसे ज्यादा असर नप पर ही पड़ा है।
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दरअसल, शहरी दायरे में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 3811 गरीब लोगों के डेढ़ लाख से लेकर ढाई लाख रुपये सरकार से मंजूर हुए थे। जिसके करीब 12 करोड़ का बजट भी नप के समक्ष भेजा जा चुका है। लेकिन पिछले एक साल से किस्त अधर में लटकने की वजह से पुराने मकान तोड़कर नया आशियाना बनाने वाले किस्त भुगतान के इंतजार में खुले आसमान के नीचे बीवी बच्चों सहित बदहाली में पड़े हैं, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। नगर परिषद में गरीबों के हक पर कुंडली जमाने की पड़ताल की गई तो पता चला कि कोरोना काल से पहले ही नगर परिषद कार्यालय में पीएमएवाई का काम देखने वाले कर्मचारी को वापस एडीसी कार्यालय में बुला लिया गया था, जबकि किस्त भुगतान का इंतजार कर रहे करीब 800 गरीब परिवारों की पीएमएवाई की फाइलें भी एडीसी कार्यालय में मंगवाई गई। तब से लेकर अब तक ये फाइलें एडीसी कार्यालय में ही धूल फांक रही हैं, जबकि बारिश के मौसम में गरीब के सिर पर छत तक नसीब नहीं हुई है।
कोट्स-
शहर के धानकान मोहल्ला वासी कमल ने बताया कि उसका करीब दो साल पहले पीएमएवाई में मकान पास हुआ था। मकान बनाने के लिए पहली किस्त भी देरी से मिली थी। पुराना मकान तुड़वा दिया। नींव भरी और खुद ही खर्च कर चारदीवारी भी बनाई, मगर छत डालने के लिए पिछले डेढ़ साल से चक्कर लगा रहा हूं, कभी अधिकारी नहीं मिलते तो कभी पद खाली होने का हवाला दिया जाता। अभी तक बकाया किस्त नहीं मिली है। पूरा परिवार बारिश के मौसम में तिरपाल के नीचे ही रहने पर मजबूर हैं।
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बावड़ीगेट क्षेत्रवासी महिला नीरज ने बताया कि पीएमएवाई की सूची में उसका मकान निर्माण का ढाई लाख मंजूर हुआ था। मकान तुड़वा दिया, ब्याज पर पैसे लेकर नींव भरी, मगर एक भी किस्त का भुगतान नहीं हुआ। अधिकारियों से बात की तो केवल आश्वासन दिए गए कि पैसे जल्द मिल जाएंगे। अब फाइल ही एडीसी कार्यालय में भेजी हैं, वहां पर कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। गरीब आदमी हैं, सिर पर छत नहीं, ब्याज की रकम चुकाने में ही पूरी मेहनत का पैसा भी जा रहा है।
चंद्रगिरी स्कूल के सामने धनकान मोहल्ला क्षेत्रवासी सीमा ने बताया कि पीएमएवाई की सूची में नाम आने के बाद उसे पुराना मकान तोड़ने के लिए बोला था। पिछले डेढ़ साल से मकान तोड़कर बैठे हैं, नींव तक भरने के लिए पैसा नहीं मिला। अब पूरा परिवार किराये पर रह रहा है। घर की जगह कोरा मैदान पड़ा है। कोई अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं आता। कार्यालय में चक्कर लगाकर भी थक चुके हैं, कोई सही से जवाब तक नहीं देता।
वर्जन-
मैं भिवानी का लिंक ऑफिसर हूं। जो बहुत ही जरूरी काम है, केवल उसी का निपटान कर रहा हूं। फिलहाल चरखी दादरी में हूं। ऑफिस में देखकर ही बता पाऊंगा कि पीएमएवाई किस्त भुगतान में आखिर दिक्कत कहां आ रही है। लाइट खराब का मामला भी संज्ञान में नहीं है।
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- मनोज यादव, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद भिवानी।
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