भिवानी में स्थित हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का मुख्य द्वार।
कैरु। प्रदेशभर में फरवरी से 10वीं व 12वीं कक्षा की परीक्षाओं का आयोजन किया जाएगा है। इसको लेकर बच्चे भी परीक्षाओं की तैयारी में लगे हैं। परीक्षा की तैयारी कैसे करें इसको लेकर विशेषज्ञ भी सफलता के सूत्र बता रहे है। विशेषज्ञों ने बताया कि परीक्षाओं के लिए अभिभावक बच्चों पर अनावश्यक दबाव न दें। उन्हें खुले दिमाग से तैयारी करने दें। सभी बच्चों की समझने और पढ़ने की क्षमा एक जैसी नहीं होती है। इसलिए उन्हें उनकी क्षमता के अनुसार ही परीक्षा की तैयारी करने में सहयोग करें।
शांत मन-मस्तिष्क से करें पढ़ाई
आदर्श विद्यालय कैरू के प्राचार्य एसएन पालीवाल ने परीक्षाओं को लेकर बच्चों पर अनावश्यक दबाव न देने व परीक्षा की तैयारियां कैसे करें, इस बारे में बच्चों के साथ-साथ अभिभावकाें को भी टिप्स दिए है। उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य को लेकर हम अभिभावक की सोच को हम गलत नहीं कह सकते। लेकिन उस सोच को चिंता की शक्ल देकर बच्चे के मन मस्तिष्क में उतार देना गलत है। इससे बच्चे भी अनावश्यक रूप से तनाव में आ जाते हैं और जो अध्ययन उन्हें सहजता से करना चाहिए, उसे वे चिंताग्रस्त होकर करते हैं। इसका दुष्परिणाम यह होता है कि उनकी समग्र ऊर्जा का केंद्र जहां अध्ययन होना चाहिए। वह विभाजित होकर आधा भय व तनाव में और आधा ही अध्ययन में लग पाता है। इस कारण वे परीक्षा में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में कई बार पिछड़ जाते हैं। परीक्षा छोटी हो अथवा बड़ी। उसका अध्ययन जितना तनाव रहित रह-रहकर शांत मन-मस्तिष्क से किया जाए, सफलता के अवसर उतने ही अधिक बढ़ जाते हैं।
अभिभावकों का नैतिक सहयोग अति आवश्यक
राजकीय माॅडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय देवराला के प्राचार्य विकास महता ने कहा कि बच्चों के लिए प्रत्येक परीक्षा निश्चित रूप से एक बड़ा पड़ाव होती है, जिसकी महत्ता वे भी भली-भांति जानते हैं। अधिकतर बच्चे परीक्षा की तैयारी समर्पित भाव से एकनिष्ठ होकर करते भी हैं, लेकिन उस समय अभिभावकों का नैतिक सहयोग उनके लिए अति आवश्यक है। काम कोई भी हो यदि पूर्व तैयारी से कर लिया जाए तो वह सदैव बेहतर ढंग से संपादित होता है। शिक्षित माता-पिता बच्चों के अध्ययन में व्यक्तिगत रुचि लें, इसके तहत वे घर पर ही छोटी-छोटी परीक्षाएं आयोजित कर, अच्छे अंक लाने पर अपने बच्चों को कोई छोटा सा उपहार भी दें, जो उनके लिए प्रिय हो। इसके तीन लाभ होंगे। पहला, बच्चे इस बहाने परीक्षाओं की तैयारी कर लेंगे। दूसरा, घरेलू माहौल में वे निर्भर होना सीखेंगे। तीसरा, उपहार की प्राप्ति से उन्हें बेहतर से बेहतर करने की प्रेरणा मिलेगी। फिर जब परीक्षा होंगी तो बच्चे अपनी पूर्व तैयारी और घरेलू प्रोत्साहन के बल पर बिना कोई तनाव पाले परीक्षा दे पाएंगे। इस प्रकार की सकारात्मक सोच को अपनाकर वे स्वयं भी तनाव मुक्त रहेंगे और बच्चों को भी परीक्षा का कोई भय या तनाव नहीं रहेगा।