भिवानी। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में टैंकर सप्लाई के नाम पर पानी का खेल चल रहा है। टैंकर सप्लाई का गड़बड़झाला उजागर हुआ तो जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अधिकारियों ने भी अब तीसरी आंख का पहरा बैठा दिया है। वहीं जलघर में तैनात चौकीदारों को भी अलर्ट किया है।
जलघर परिसर से बाहर जाने वाले हर टैंकर की निगरानी चौकीदार से लेकर जेई तक करेंगे। वहीं टैंकर जिस हिस्से में सप्लाई होगा। उस क्षेत्र के लोगों से भी जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अधिकारी फीडबैक लेंगे। विभाग ने सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में पानी के टैंकर भरने और उनके सप्लाई के सत्यापन की जिम्मेदारी भी संबंधित कनिष्ठ अभियंताओं को सौंपी है।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में शहर की करीब साढ़े चार लाख की आबादी की प्यास बुझाने के लिए तीन मुख्य जलघर हैं। लेकिन शहर की करीब 15 से अधिक कॉलोनियां तो ऐसी हैं, जिनके अंदर अभी तक पेयजल लाइन ही नहीं डाली गई है। इन कॉलोनियों के लोगों को जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग रोजाना पानी के टैंकर सप्लाई कराता है। इसके लिए विभाग ने चार से पांच ठेकेदारों को भी हायर किया हुआ है जो करीब 14 पानी के टैंकरों से इन कॉलोनियों या फिर जरूरत के हिसाब से बाहरी इलाकों में पानी टैंकर सप्लाई करते हैं।
प्रत्येक पानी के टैंकर सप्लाई पर करीब साढ़े पांच सौ रुपये जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग भुगतान कराता है। लेकिन जलघर से पानी भरने के बाद ये टैंकर बाहर प्राइवेट लोगों को एक हजार से 1200 रुपये में पानी बेच डालते हैं, जिसकी स्टिंग वीडियो भी विभाग के सामने आई तो अधिकारियों ने इस मामले पर आनन-फानन में जांच बैठा दी और ठेकेदारों के टैंकर सप्लाई पर भी तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी। टैंकर सप्लाई गड़बड़झाले में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने एक तरफ तो तीन सदस्यीय जांच कमेटी बैठा दी है वहीं भविष्य में पानी के टैंकरों की निगरानी के लिए भी व्यवस्था और अधिक सख्त कर दी है।
टैंकर फिलिंग स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। वहीं गेट पर तैनात चौकीदार को भी पानी का कौन सा टैंकर किस इलाके के लिए निकला देखना होगा। इसका सत्यापन संबंधित जेई से होगा। इसके बाद उस इलाके के लोगों से भी फीडबैक जाना जाएगा। इस तरह से पानी का टैंकर प्राइवेट लोगों को बेचने के मामलों पर विभाग अंकुश लगाएगा।
ऐसे चल रहा है लंबे अर्से से पानी का खेल
महम रोड स्थित पुराने जलघर में पानी टैंकर फिलिंग के लिए अलग से स्टेशन बना हुआ है। जिस पर एक भूमिगत ट्यूबवेल भी लगा है, जबकि फिल्टर हुआ नहरी पानी भी उपलब्ध है। इस पानी को केवल डिमांड या फिर शहर की बाहरी कॉलोनियों में नि:शुल्क सप्लाई टैंकर से किया जाता है। इसके लिए ठेकेदार को प्रति टैंकर 550 रुपये भुगतान विभाग से होता है। लेकिन जलघर से भरकर निकला टैंकर सीधे औद्योगिक इकाइयों में पहुंच रहे हैं या फिर निजी लोगों को बेचे जा रहे हैं। औद्योगिक इकाइयों में स्वच्छ पानी की बहुत ज्यादा खपत रहती है। इसलिए टैंकर मालिकों से सांठगांठ रहती है। टैंकर की सप्लाई किसी स्लम या फिर बाहरी इलाके में रिकार्ड के अंदर दर्शायी जाती है जबकि उसे खाली किसी फैक्टरी के अंदर किया जाता है। ऐसे कई टैंकरों की स्टिंग वीडियो भी विभाग के सामने आया है। इससे पानी का पूरा खेल खुल गया।
शहर के इन हिस्सों में टैंकरों की सबसे अधिक खपत
शहर के पीपलीवाली जोहड़ी क्षेत्र, बैंक कॉलोनी, न्यू डिफेंस कॉलोनी, न्यू भारत नगर कालोनी, लक्ष्मी नगर, कोंट रोड, ढाणा रोड की कॉलोनी, राजीव कॉलोनी, नेताजी नगर, लाइनपार हालुवास गेट क्षेत्र, हनुमान ढाणी का बाहरी क्षेत्र, अमर नगर टिब्बा बस्ती का इलाका, डाबर कॉलोनी, उत्तम नगर सहित दिनोद रोड की कई कॉलोनियों में पानी के टैंकरों की सबसे अधिक डिमांड रहती है। मगर मांग के बावजूद यहां विभाग से बहुत कम पानी के टैंकर पहुंचते हैं।
रिकाॅर्ड की होगी जांच
जलघर के गेट पर चौकीदार पानी के टैंकरों का हिसाब रखता है। इन टैंकरों के रिकाॅर्ड की भी अब विभागीय अधिकारी जांच कराएंगे और यह पता लगाएंगे कि पिछले कुछ अर्से में इन इलाकों में कितने पानी के टैंकर पहुंचे हैं। इससे ही टैंकर सप्लाई के गड़बड़झाले का खेल उजागर होगा और किन-किन की भूमिका शामिल है यह भी पता लगेगा।
पानी के टैंकरों की सप्लाई में अनियमितता की शिकायत पर मामले की जांच चल रही है। वहीं जलघर में पानी टैंकर फिलिंग प्वाइंट पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं। चौकीदार प्रत्येक पानी के टैंकर की डिटेल दर्ज करने के बाद संबंधित जेई से इसका सत्यापन करवाएगा। फिर जेई संबंधित इलाके के लोगों से भी फीडबैक लेगा। अगर पानी के टैंकर को लेकर कहीं कोई कोताही सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार पर कार्रवाई होगी।
-प्रमोद कुमार, कार्यकारी अभियंता शहरी पेयजल शाखा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग भिवानी।