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न किसी से बैर, नहीं अपराध से सरोकार, खुद ग्रामीण चला रहे गांव में भाईचारे की सरकार

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धर्मपाल शर्मा, सरपंच लालावास। - फोटो : Bhiwani
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संजय वर्मा
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भिवानी। पुलिस थाना, कोर्ट-कचहरी और प्रशासन का नाम आते ही हर किसी के दिमाग में कोई न कोई विवाद गहराने की बात कौंध जाती है। मगर जिले के 23 गांव ऐसे भी हैं, जहां अपराध दस्तक देना ही भूल गया है। जिले के आठ गांव ऐसे हैं जहां पिछले तीन साल से न ही कोई बड़ा विवाद हुआ और न ही पुलिस तक जाने की नौबत आई है। लोहारू क्षेत्र का गांव लालपुर तो आपसी भाईचारे की ऐसी मिसाल बन चुका है, जिसमें 2015 से ही कोई भी मामला पुलिस थाने तक नहीं पहुंचा है। पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह ने भी इन गांवों के आपसी सौहार्द और भाईचारे को देखकर ग्रामीणों द्वारा आपसी मामले सुलझाने की सूझबूझ को अन्य गांवों के लिए प्रेरणादायी बताया है। एसपी का कहना है कि अमनचैन और आपसी भाईचारे के आगे सब कुछ फीका है, इसकी मिठास न केवल ग्रामीणों को एकता के सूत्र में बांधे रखती है, बल्कि अपराध भी कोसो दूर रहते हैं।
भिवानी जिले में करीब साढ़े तीन सौ से अधिक ग्राम पंचायतें आती हैं। ये पंचायतें पांच साल के लिए चुनी जाती हैं, लेकिन जिले के कुछ गांवों ने तो इन पंचायतों के आगे आपसी भाईचारे की मजबूत दीवार खड़ी कर दी हैं, जिसे अपराध के लिए तोड़ पाना भी मुश्किल हो गया है। इन गांवों में छोटे-मोटे विवादों के लिए पुलिस थाने या फिर सरकार और प्रशासन के समक्ष फरियाद लेकर नहीं जाना पड़ता, बल्कि खुद मिल बैठकर मामले आपसी सूझबूझ से ही सुलझ जाते हैं। इन गांवों में तीन साल के दौरान एक बार भी ऐसी नौबत नहीं आई कि किसी विवाद में पुलिस को केस दर्ज करना पड़ा हो। ये विवाद आपसी सहमति से ही न केवल सुलझे हैं, बल्कि ग्रामीणों के दिलों में तनिक भी मनमुटाव नहीं आया है। यही वजह है कि ये अमनचैन पसंद ग्रामीण पूरे जिले के लोगों के लिए प्रेरणादायी बन चुके हैं।
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इन गांवों के नाम पुलिस की अपराध फाइलों से गायब
आम तौर पर पुलिस की फाइलों के अंदर हर गांव में अपराध और अपराधियों का पूरा ब्यौरा दर्ज होता हैं, मगर जिले के कुछ गांव ऐसे भी हैं जिनके नाम पिछले कुछ सालों से पुलिस की अपराध फाइलों से ही गायब हैं। इनमें जूईकलां पुलिस थाना क्षेत्र के गांव जैनपुरा, खैरपुरा, भांखड़ा, हरिपुरा, पथराली, लालावास, आजाद नगर शामिल हैं। सिवानी पुलिस थाना क्षेत्र के गांव खरकड़ी, चनाना, रुपाना हैं। बवानीखेड़ा पुलिस थाना क्षेत्र के गांव भैणी ठाकरान, जैमलपुरा, सुखपुरा, सुमड़ाखेड़ा शामिल हैं। इसी तरह लोहारू पुलिस थाना क्षेत्र के गांव ढाणी अकबरपुर, बसीरवास, कुशलपुरा, फरटीया ताल, ढाणी अहमद, ढाणी गंगा बिशन, ढाणी ढोला, अमीरवास, ढाणी ढोला, अमीरवास, ढाणी लालपुर शामिल है। बहल पुलिस थाना क्षेत्र के गांव ढाणी शहजादपुर, सौरड़ाकद्दीम, गारणपुरा, ढाणी शहजानपुर, ढाणी ओबरा, कासनी खुर्द, सलेमपुर, लाड़ावास, कासनी कलां के नाम शामिल हैं।
एक साल में महिला पुलिस थाने पहुंचे 721 केस, 456 लोगों का घर बसा
पति-पत्नी के बीच आपसी तकरार के मामले भी ज्यादातर पुलिस थानों में पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि 2021 में महिला पुलिस थाने में घरेलू हिंसा और महिला अपराध के 721 केस पहुंचे। जिनमें 465 मामलों में दोनों पक्षों का आपसी समझौता कराकर पुलिस ने घर बसाने का काम किया। जबकि 256 मामले ही संबंधित पुलिस थानों तक आगामी कार्रवाई के लिए पहुंचे।
हमारा गांव अमन पसंद है, यही वजह है कि गांव के अंदर ग्रामीणों के बीच आपसी मनमुटाव थाने पहुंचने से पहले ही आपसी बातचीत के जरिये दूर करा दिए जाते हैं। कई सालों से पुलिस गांव में किसी अपराध की तफ्तीश करने या अपराधी को पकड़ने नहीं आई है। पुलिस के मौजिज लोग भी पुलिस प्रशासन का क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने में पूरा सहयोग कर रहे हैं।
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- धर्मपाल शर्मा, सरपंच गांव लालावास (जूईकलां)
अपराध और अपराधियों की मानसिकता की वजह से लगातार अपराध के नए नए मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन यह सुखद और प्रेरणादायी बात है कि हमारे जिले के कुछ गांव ऐसे भी हैं, जिनमें तीन साल के दौरान कोई पुलिस केस दर्ज नहीं हुआ। इन गांवों में छोटे-मोटे मामले पुलिस थाने पहुंचने से पहले ही सुलझ जाते हैं। पुलिस भी ग्रामीणों की भावनाओं और फैसले का स्वागत करती है। इसी तरह हर गांवों में अगर लोग जागरूक और आपस में मिलजुल कर रहें तो जिले में अपराध का ग्राफ काफी कम हो जाएगा और पुलिस भी लोगों की बेहतर ढंग से सुरक्षा कर पाएगी।
- अजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक भिवानी।
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