भिवानी/बवानीखेड़ा। बवानीखेड़ा नगरपालिका की सियायत में आए भूचाल में नपा चेयरपर्सन की कुर्सी चली गई है। नपा चेयरपर्सन कांता किरण के खिलाफ शुक्रवार को लाए गए पार्षदों के अविश्वास प्रस्ताव को लेकर भिवानी के डीआरडीए हाल में एडीसी की अध्यक्षता में बैठक हुई।
बैठक में बवानीखेड़ा नपा के 15 में से 10 पार्षद मौजूद रहे, जिनमें सभी पार्षदों ने चेयरपर्सन कांता किरण के खिलाफ ध्वनि मत व गुप्त मतदान डालकर खिलाफत की। नपा चेयरपर्सन के विपक्ष में उतरे 10 पार्षदों की खिलाफ वोटिंग की प्रोसिडिंग भी अतिरिक्त उपायुक्त ने उपायुक्त को भेज दी है। वहीं अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के बाद कांता किरण ने भी चेयरपर्सन पद से इस्तीफा दे दिया।
बवानीखेड़ा में भाजपा समर्थित चेयरपर्सन कांता किरण के खिलाफ लगातार पार्षदों ने भ्रष्टाचार और कस्बे में विकास कार्यों में भेदभाव के आरोप प्रत्यारोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया था। नपा चेयरपर्सन की कार्यशैली से नाराज पार्षदों ने दो बार खिलाफत कर अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रयास किया, मगर चेयरपर्सन ने हर बार स्थिति को संभाला था। लेकिन अब तीसरी बार नपा चेयरपर्सन के खिलाफ पार्षदों का बड़ा धड़ा खिलाफत में खड़ा हो गया। जिसके कोपभाजन से कांता किरण की कुर्सी भी छिन गई। गत 11 अक्तूबर को कांता किरण के खिलाफ पार्षदों ने डीसी को अविश्वास प्रस्ताव का हलफनामा दिया था। जिसके बाद शुक्रवार को पार्षदों की बैठक एडीसी की अध्यक्षता में बुलाई गई थी। इसमें नपा के कुल 15 पार्षदों में से 10 पार्षद पहुंचे थे। बैठक में मौजूद सभी पार्षदों ने नपा चेयरपर्सन के खिलाफ ध्वनि मत से खिलाफत की और गुप्त मतदान भी उनके खिलाफ किया। जिसके बाद एडीसी ने इस रिपोर्ट को उपायुक्त के समक्ष भेज दी। बहुमत से नपा चेयरपर्सन के खिलाफ हुए मतदान के बाद कुर्सी को लेकर चला आ रहा विवाद भी खत्म हो गया और इसी के साथ नए चेयरमैन की होड़ और सिसायी दौड़ शुरू हो गई। जिसमें तीन दिग्गज पार्षदों के नाम सामने आ रहे हैं, जो नपा की कुर्सी को लेकर काफी समय से खींचतान में जुटे थे। इनमें पहला नाम वार्ड चार की मीना चौपड़ा का है, जबकि चेयरमैन की दौड़ में वार्ड दो के अजय वाल्मीकि और वार्ड 12 के रमेश काजल शामिल हैं।
इन पार्षदों ने किया चेयरपर्सन के खिलाफ मतदान
अविश्वास प्रस्ताव की बैठक में बवानीखेड़ा नपा के वार्ड चार से पार्षद मीना चौपड़ा, वार्ड दो से अजय वाल्मीकि, वार्ड छह से पंकज महता, वार्ड 12 से रमेश काजल, वार्ड 14 से पार्षद एवं नपा उपप्रधान ओमपति यादव, वार्ड 13 से चांदराम, वार्ड सात से सुदेश रानी, वार्ड आठ से हिम्मत, वार्ड नौ से प्रेमपाल, वार्ड 11 से रितु रानी के नाम शामिल हैं। इन सभी ने ध्वनि मत और गुप्त मतदान कर चेयरपर्सन का विरोध किया।
कांता ने खटखटाया था हाईकोर्ट का दरवाजा
पिछले पांच माह से विपक्षी पार्षदों द्वारा कुर्सी की खींचतान को लेकर कांता किरण ने हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था और अविश्वास प्रस्ताव को चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट से भी उसे कोई राहत नहीं मिली थी। नगर परिषद में करीब डेढ़ साल का कार्यकाल अभी बाकी है।
भ्रष्टाचार और विकास कार्यों में भेदभाव बने मुद्दे
नपा चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पार्षदों ने विकास कार्यों में भेदभाव और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया। कई पार्षदों ने विकास कार्यों को लेकन अनदेखी किए जाने के भी आरोप जड़े और इस संबंध में काफी बार शिकायतें भी दी गई। विपक्ष में वोट करने के बाद पार्षदों ने लघु सचिवालय परिसर में मीडिया के समक्ष कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही जंग में उनकी जीत हुई है। भविष्य में तीन पार्षदों में से किसी को प्रधान चुना जाएगा।
कांता ने अपने त्यागपत्र में बताई पारिवारिक वजह
अविश्वास प्रस्ताव के बाद शुक्रवार को ही कांता किरण ने चेयरपर्सन पद से इस्तीफा उपायुक्त को भेज दिया। जिसमें उन्होंने बताया कि वह अपनी पारिवारिक व्यस्तताओं के चलते जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ हैं। इस वजह से वह अपने पद से इस्तीफा दे रही हैं। 22 जून 2018 को वह चेयरपर्सन चुनी गई थीं। उन्होंने तीन साल चार माह 21 दिनों तक बवानीखेड़ा नपा में चेयरपर्सन का पदभार संभाला।
पार्षदों ने चेयरपर्सन के खिलाफ की वोटिंग
बवानीखेड़ा के पार्षदों की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें वोटिंग के समय 10 पार्षद पहुंचे थे। पार्षदों ने वोटिंग चेयरपर्सन के खिलाफ की है। बैठक की प्रोसिडिंग की रिपोर्ट आगामी कार्यवाही के लिए उपायुक्त को भेज दी है।
-राहुल नरवाल, अतिरिक्त उपायुक्त भिवानी।