शहर के बृजवासी कॉलोनी निवासी कमोद देवी ने बताया कि उसने अपना 50 वर्गगज का मकान बेचा है। इसकी रजिस्ट्री ललिता के नाम होनी है। उसे जो टोकन दिया है। उस पर डीआरओ का नाम लिखा है। मगर, डीआरओ कार्यालय में रजिस्ट्री के लिए पहुंचे तो वहां पता चला कि अभी यहां कोई व्यवस्था तक नहीं है। विक्रेता और खरीदार के साथ दो गवाह भी मौजूद है। सभी दस्तावेज जमा हो चुके हैं, मगर फिर भी रजिस्ट्री नहीं बनी। टोकन पर रजिस्ट्री का समय 11 बजकर आठ मिनट का समय दर्शाया है। अब शाम चार बज चुके हैं, ऑनलाइन टोकन का फिर क्या मतलब है।
नई अनाज मंडी क्षेत्र निवासी साधु सिंह ने बताया कि वह और उसकी पत्नी लक्ष्मी देवी अपने बेटे के नाम अपना रिहायशी मकान ब्लड रिलेशन की रजिस्ट्री के तहत कराने के लिए सुबह तहसील कार्यालय में आए थे। उन्हें 11 बजे रजिस्ट्री का टोकन भी मिला था, मगर शाम तक उनकी रजिस्ट्री नहीं हुई। रजिस्ट्री के टोकन पर डीआरओ लिखा है। जिस वजह से तहसीलदार का रजिस्ट्री क्लर्क भी रजिस्ट्री नहीं कर रहा है और न ही डीआरओ ऑफिस में कोई रजिस्ट्री हो रही है।
भूमि की रजिस्ट्री के संबंध में हरियाणा सरकार के आदेश जारी हो चुके हैं, लेकिन अभी तक मेरी अलग से लॉगइन आईडी नहीं बनी है। इसकी प्रक्रिया चल रही है। मेरे कार्यालय में रजिस्ट्री के लिए अलग से रजिस्ट्री क्लर्क और एक कंप्यूटर ऑपरेटर की व्यवस्था भी कराई जाएगी। ये एक दो दिन में हो जाएगा। इसके बाद डीआरओ कार्यालय में भी भूमि की रजिस्ट्री टोकन सिस्टम के आधार पर संभव हो जाएगी। - राजकुमार, जिला राजस्व अधिकारी, भिवानी।
भिवानी नंबरदार एसोसिएशन के प्रधान इंद्रपाल सिंह ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के सुबह 11 बजे टोकन कट जाते हैं उनकी शाम पांच बजे तक भी रजिस्ट्री नहीं होती है। भिवानी तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री पहले फीड करने के नाम पर भी तीन सौ से पांच सौ रुपये वसूले जा रहे हैं। जो लोग ये पैसे दे देते हैं, उनकी रजिस्ट्री टोकन से पहले ही दर्ज कर दी जाती है। रोजाना 200 टोकन कट रहे हैं, मगर मुश्किल से रजिस्ट्री 50 से 60 भी नहीं हो पाती। ये तहसील कार्यालय में बड़ा भ्रष्टाचार है।