22 सितंबर की शाम आकाश गांव पहुंचा। घर आते समय आकाश की खुशियों का ठिकाना नहीं था। पर घर पहुंचते ही सारी खुशियां मातम में बदल गईं। जब आकाश को घर में मां नहीं मिली। आकाश की मां की मौत 14 सितंबर की रात को हो चुकी थी लेकिन परिजनों के कहने पर कोच ने भी आकाश को ये जानकारी नहीं दी।
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आकाश ने बताया कि मां ने स्वर्ण पदक लाने को लेकर बहुत संघर्ष व मेहनत की थी। अपनी मां के इस संघर्ष के कारण ही वो गोल्ड मेडल जीत पाया। आकाश ने कहा कि उसकी मां ने कहा था कि वो गोल्ड मेडल देखना चाहती है। आकाश ने बताया कि अब वो अगले महीने सर्बिया में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी कर रहा है और उसके बाद कॉमनवेल्थ व एशियन और एक दिन ओलंपिक में गोल्ड जीतकर अपनी मां का सपना पूरा करना चाहता था।
आकाश के चाचा भंवर सिंह ने बताया कि आकाश को मां की मौत की सूचना उसके भविष्य को देखते हुए नहीं दी थी। वहीं उनके कहने पर कोच ने भी बात मानी और आकाश व साथी मुक्केबाजों के फोन जमा कर लिए थे। उन्होने बताया कि आकाश के पिता की मौत साल 2008 में हो चुकी है। चाचा ने कहा कि आकाश मे अपनी मां के सपने को पूरा किया लेकिन उसकी मां का गोल्ड देखने का सपना पूरा नहीं हो सका।