गो तस्करों की अक्तूबर 2018 में भी गो सेवकों के साथ बापोड़ा चौक पर भिड़ंत हुई थी। इसमें दोनों ही तरफ से पत्थरबाजी हुई थी। इस दौरान गो तस्करों का कंटेनर सड़क किनारे खड़े बिजली पोल से भी टकराया था। इसके बाद आरोपी कंटेनर छोड़कर भाग गए। उस समय करीब 20 गोवंश को गो तस्करों से मुक्त कराया गया। गो तस्कर गोवंश को तोशाम से कंटेनर में भरकर भिवानी की तरफ आ रहे थे। बापोड़ा चौक पर नाकाबंदी कर उन्हें रोका गया था।
तोशाम क्षेत्र से गो तस्कर गोवंश को गाड़ी में भरकर जा रहे गो तस्करों से गो सेवकों की भिड़ंत हुई थी। मामला 2022 का है। भिवानी गो रक्षा दल सदस्यों की तस्करों ने उस समय दो गाड़ियों को भी तोड़ डाला था और जमकर पत्थर पीछा कर रहे गो सेवकों की गाड़ियों पर बरसाए थे। इस दौरान दो लोगों को पकड़ा गया और 15 गोवंश को मुक्त कराया था।
हांसी गेट बासिया भवन के समीप भी गो सेवकों पर तस्करों ने फायरिंग की थी। इस दौरान गो तस्कर गाड़ी लेकर भागने में कामयाब रहे थे। वहीं पुलिस ने भी मामले की छानबीन की। मगर तस्करों का कोई सुराग नहीं लगा था। इस दौरान पुलिस को गोली के खाली खोल भी मिले थे।
गो तस्करों का लोकल नेटवर्क फैला हुआ है। इनकी मदद से गो तस्कर यहां रात के समय गाड़ियों में गोवंश को भरकर गोकशी के लिए ले जाते हैं। सर्दियों की शुरुआत में अधिकांश किसान अपनी फसल बिजाई कर रहे होते हैं और पशुओं के लिए चारे का संकट होता है। लावारिस पशु के झुंड की सूचना भी तस्करों तक लोकल नेटवर्क के जरिये ही पहुंचती हैं। गो सेवकों के साथ कई बार गो तस्करों की भिड़ंत में फायरिंग हुई है और काफी गाड़ियों को भी तस्कर तोड़ चुके हैं। गो रक्षा दल के सदस्य पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर गो तस्करी में शामिल लोगों को पकड़वा चुके हैं। -संजय परमार, अध्यक्ष जिला गो रक्षा दल भिवानी।