भिवानी। मनीषा मौत प्रकरण की गुत्थी को सुलझाने में जुटी सीबीआई को 66 दिन बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। सिंघानी के पास खेत में जहां मनीषा का शव बरामद हुआ था वह इलाका अब भी टेपिंग से सील है। माना जा रहा है कि इसी दायरे में मनीषा की मौत से जुड़े कई अहम राज छिपे हुए हैं।
सीबीआई की टीम अब तक सात बार घटना स्थल का मुआयना कर चुकी है जबकि दिल्ली से आई एफएसएल टीम ने भी मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए और घटनास्थल का सीन रिक्रिएशन किया। बावजूद इसके यह सवाल अब भी बरकरार है कि मनीषा आखिर किन परिस्थितियों में वहां तक पहुंची और क्या उसने वास्तव में जहर निगला था या नहीं क्योंकि मौके से किसी भी तरह की शीशी या बोतल बरामद नहीं हुई थी।
गौरतलब है कि मनीषा 11 अगस्त को लापता हुई थी और उसका शव 13 अगस्त को सिंघानी नहर के पास खेत में मिला था। उस जगह को अब 77 दिन से टेपिंग के जरिये सील किया गया है। सीबीआई ने अपनी 66 दिन की जांच अवधि में सात बार वहां निरीक्षण किया लेकिन अभी तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया।
घटना के बाद पुलिस ने दावा किया था कि मनीषा ने सिंघानी स्थित एक कीटनाशक विक्रेता से एक लीटर कीटनाशक खरीदा था। इस दावे की पुष्टि के लिए सीबीआई ने उस विक्रेता से करीब पांच बार पूछताछ की और उसका रिकॉर्ड कब्जे में लिया। विक्रेता ने बताया था कि मनीषा ने खरीद के समय दुकान के रजिस्टर में हस्ताक्षर किए थे लेकिन सीबीआई को जांच में ऐसा कोई हस्ताक्षर या प्रविष्टि नहीं मिली।
दुकान पर लगे सीसीटीवी कैमरे में मनीषा दुकान के आगे से पैदल गुजरती हुई जरूर दिखाई दी लेकिन दुकान के अंदर जाती हुई नहीं दिखी। इस तथ्य की पुष्टि मनीषा के पिता संजय ने भी सीबीआई जांच में की है। उनका कहना है कि उनकी बेटी ने न तो जहर खाया और न ही आत्महत्या की बल्कि उसकी हत्या की गई है।
सीबीआई अब कीटनाशक विक्रेता के बयानों की भी गहराई से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मनीषा के शरीर में कीटनाशक के अंश मिलने की पुष्टि जरूर हुई है लेकिन उससे संबंधित कोई शीशी या बोतल अब तक नहीं मिली। ऐसे में सीबीआई भी कीटनाशक वाली थ्योरी को संदेहास्पद मानकर जांच को आगे बढ़ा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीबीआई की जांच भले ही लंबे समय से जारी है पर टेपिंग से सील वह जगह अब भी रहस्यों से घिरी हुई है। उम्मीद है कि इन्हीं सुरागों से मनीषा मौत की यह गुत्थी सुलझ सकेगी।