भिवानी। कोरोना संक्रमण की तीन लहरें जिलावासी झेल चुके है। दूसरी लहर के दौरान नागरिक अस्पताल में सुविधाओं और स्टाफ का टोटा काफी खला। चिकित्सकों व स्टाफ ने काफी जज्बा दिखाया। स्टाफ और संसाधनों की कमी के बावजूद कई लोगों जानें बचाईं। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग ने जिला नागरिक अस्पताल में कुछ मशीनें भी उपलब्ध करवाईं, लेकिन इन मशीनों को चलाने के लिए विशेषज्ञ नहीं हैं। आज विश्व स्वास्थ्य दिवस है। इस उपलक्ष्य में हमने जिले में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत को जाना।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 66 पद स्वीकृत हैं। कार्यरत महज 27 हैं। ओपीडी में उमड़ती भीड़ को देखते हुए यहां कम से कम 90 चिकित्सक होने चाहिए। नागरिक अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं का खामियाजा जिले के नागरिकों को ही भुगतना पड़ रहा है।
मशीनों के संचालन के लिए अनुभवी स्टाफ की आवश्यकता
नागरिक अस्पताल में आईसीयू, आइसोलेशन वार्ड और नीकू आईसीयू में वेंटिलेटर, बाइपेप मशीन, नीकू वेंटिलेटर, स्टीमर सहित ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था की हुई है। इस सब मशीनों के सफल संचालन के लिए अनुभवी स्टाफ की आवश्यकता है, लेकिन अस्पताल में जो स्टाफ है उसे ठीक से उनका प्रयोग करना नहीं आता। हालांकि कुछ मशीनें तो अस्पताल के विभिन्न वार्डों में इंस्ट्रॉल करवा दी हैं। वहीं, स्टाफ की कमी से कुछ मशीनें अस्पताल के स्टोर रूम धूल फांक रही हैं।
रंगीन अल्ट्रासाउंड की मशीन बंद
अस्पताल में कई साल पहले रंगीन अल्ट्रासाउंड की मशीन आई थी। इसके आने के बाद जिले के नागरिकों को खुशी थी कि वे अब मुफ्त में रंगीन अल्ट्रासाउंड करवा सकेंगे। स्वास्थ्य विभाग ने यह मशीन तत्कालीन डिप्टी सिविल सर्जन को सौंपी थी, लेकिन इस मशीन का संचालन नहीं हो पाया। इसकी वजह से मरीजों को उपचार के लिए आवश्यक रंगीन अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए प्राइवेट लैब में चक्कर काटने पड़ते हैं। वहीं सरकारी में निशुल्क मिलने वाले सुविधा के लिए उन्हें बाहर 1000 से 1500 रुपये देने पड़ते है।ं अस्पताल में रेडियोग्राफर के लिए 16 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से सात ही तैनात हैं। ऐसे में रेडियोग्राफर के भी नौ पद खाली हैं।
ओपीडी के साथ ही बंद हो जाते है एक्स-रे और लैब
अस्पताल की ओपीडी का समय फिलहाल सुबह आठ से दोपहर दो बजे का है। इस दौरान ही एक्स-रे और कमरा नंबर 25 में बनी लैब खुले रहते हैं। ओपीडी बंद होते ही दोनों जगह पर ताला लग जाता है। आपातकालीन विभाग में अगर कोई मरीज आता है तो उसे बाहर निजी लैब में ही जांच और एक्स-रे करवाना पड़ता है। ऐसे में संसाधन होने के बावजूद मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र में महज 80 चिकित्सक दे रहे सेवाएं
जिले में 28 स्वास्थ्य केंद्र हैं, जिनमें से छह सीएचसी और 22 पीएचसी हैं। इनके अलावा बवानीखेड़ा, तोशाम और सिवानी में नागरिक अस्पताल है। इन केंद्रों पर 80 मेडिकल ऑफिसर कमान संभाले हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्र में पर्याप्त चिकित्सक न होने की वजह से मरीजों को निजी अस्पतालों में मोटी रकम देकर उपचार कराना पड़ रहा है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में एंबुलेंस की भी काफी कमी है, जिसकी वजह से गंभीर मरीजों को अस्पताल तक लेकर आना काफी समस्याएं पैदा कर देता है।
दूसरी लहर के बाद बढ़ी ऑक्सीजन बेड की सुविधा
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में जिले में ऑक्सीजन सिलिंडर में कमी हो गई थी, जिसकी वजह से संक्रमितों की स्थिति बिगड़ गई थी। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था बेहतर करने का प्रयास किया। इसके तहत जिले में कुल 909 बेड की सुविधा की, इनमें से सरकारी अस्पताल में 634 बेड और 275 प्राइवेट बेड की व्यवस्था की है। इनमें से 421 सेंट्रल ऑक्सीजन बेड हैं। इनमें से सरकारी अस्पताल में 299 व प्राइवेट में 122 बेड, 53 आईसीयू बेड में से 28 सरकारी और 25 निजी अस्पताल में, 488 कंसंट्रेटर सिलिंडर में से 335 सरकारी और 153 निजी अस्पताल में की सुविधा है। (संवाद)
सरकारी और निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलिंडर की सुविधा
सिलिंडर सरकारी प्राइवेट
डी टाइप 237 108
बी टाइप 753 00
एल टाइप 06 00
कंसंट्रेटर 245 73
स्वास्थ्य विभाग के रिक्त पदों की जानकारी:
पद कुल कार्यरत रिक्त
डिप्टी सीएमओ 08 02 06
एसएमओ 08 03 05
एमओ 66 27 39
स्टाफ नर्स 143 73 70
डेंटल सर्जन 33 22 11
नर्सिंग सिस्टर 16 08 09
एलटी 47 20 27
पीएचएन 05 03 02
सहायक 27 14 13
स्टेनो 12 10 02
क्लर्क 35 34 01
कॉमन क्लर्क 10 06 04
ड्राइवर 15 11 04
एमपीएचडब्ल्यू फीमेल 151 119 31
एमपीएचडब्ल्यू मेल 142 141 01
एमपीएचएस फीमेल 29 21 03
एमपीएचएस मेल 30 29 01
सुविधा देने का कार्य चल रहा है
अस्पताल में स्टाफ की कमी लंबे समय से बने हुए हैं, जिसके लिए मुख्यालय में पत्र भेजा हुआ है। नया स्टाफ जब तक नहीं मिलता, तब तक वर्तमान में कार्यरत स्टाफ को जिम्मेदारियां दी हुई हैं। स्टाफ काफी मेहनती है। मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग निरंतर कार्य कर रहा है।
- डॉ. एडविन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।