तोशाम। सर्दियों की शुरुआत के साथ दुधारू गायों में लंपी रोग का खतरा बढ़ जाता है जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में एसडीएम रवि मीणा (आईएएस) ने पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं को ठंड से सुरक्षित रखें। उपमंडल में कुल 97,926 पालतू पशु और 20,721 गाय पंजीकृत हैं।
एसडीएम ने बताया कि पशुओं को ठंड से बचाने के लिए उनके बाड़ों को हवा-रोधी बनाया जाए और पुआल या सूखी बिछावन का प्रयोग किया जाए। आवश्यकता अनुसार जूट के बोरे या कंबल पहनाए जाएं। पशुओं को गुनगुना पानी पिलाने के साथ संतुलित और पौष्टिक आहार दिया जाए। पशु चिकित्सक की सलाह से समय पर टीकाकरण कराने से पशु स्वस्थ और ऊर्जावान रहते हैं।
क्या है लंपी रोग
तोशाम उपमंडल पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील शर्मा ने बताया कि लंपी स्किन रोग एक वायरल बीमारी है, जो पॉक्स वायरस परिवार से संबंधित है। यह मुख्य रूप से गायों और भैंसों को प्रभावित करती है। इस रोग में त्वचा पर गांठें बनती हैं, बुखार आता है, दूध उत्पादन घटता है और वजन कम हो जाता है। इससे पशुपालकों को आर्थिक क्षति होती है। इस बीमारी का कोई सीधा इलाज नहीं है इसलिए टीकाकरण और रोकथाम सबसे प्रभावी उपाय हैं।
लंपी रोग के लक्षण
डॉ. शर्मा के अनुसार पशुओं के शरीर पर 0.5 से 5 सेंटीमीटर तक कठोर, चपटी गांठें बनती हैं, जो बाद में घाव का रूप ले सकती हैं। इसके अलावा तेज बुखार, आंख और नाक से पानी आना, भूख न लगना, पैरों और थनों में सूजन, सांस लेने में परेशानी, दूध उत्पादन में कमी और कभी-कभी गर्भपात भी देखा जाता है।
रोग से बचाव के उपाय
उन्होंने बताया कि मच्छर और मक्खियां वायरस फैलाने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं इसलिए कीट नियंत्रण जरूरी है। पशुओं को मिनरल मिक्सचर और पौष्टिक चारा दिया जाए। घरेलू उपाय सहायक हो सकते हैं, जैसे नीम, बबूल और पीपल की छाल का काढ़ा तथा नीम की पत्तियों का धुआं, लेकिन किसी भी उपचार से पहले पशु चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है। लक्षणों के आधार पर बुखार, सूजन और संक्रमण की दवाएं दी जाती हैं, इसलिए रोकथाम पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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