धर्म नगरी छोटी काशी का छोटा सा शहर धीरे-धीरे सनातन संस्कृति का धावक बनता जा रहा है। कस्बे में सनातन धर्म के अनेक महत्वपूर्ण स्थान है, जिनका अपना ऐतिहासिक महत्व है। कस्बे में निर्माणाधीन सूर्यनारायण द्वार कौतूहल का विषय बना हुआ है। जहां आगामी महीनों में भगवान सूर्य सात श्वेत अश्वों वाले रथ पर विराजमान होंगे।
दादी गौरी व गोगाजी सेवा समिति सदस्य मंजीत राठौड़ ने बताया कि सूर्य नारायण द्वार का निर्माण बवानीखेड़ा निवासी समाजसेवी तरुण राठौड़ अपने खर्च पर करवा रहे हैं। भगवान सूर्यनारायण जहां भगवान सूर्य सात श्वेत अश्वों वाले रथ पर विराजमान होंगे। यह द्वार अपने आप में पहला और अनोखा है। गोगामेड़ी मंदिर में भगवान सूर्यनारायण द्वार गोगामेड़ी धाम को चार चांद लगाएगा एवं श्रद्धालुओं को आस्था की एक और प्रतिमूर्ति देखने को मिलेगी। इस गेट और सूर्य भगवान के रथ के निर्माण में 15 से 20 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह गेट सभी मंदिरों का मुख्य द्वार होगा। यहां से चलकर श्रद्धालु आगे मंदिरों में दर्शन करने पहुंचेंगे।
समाजसेवी तरुण राठौड़ बवानी खेड़ा के गर्ल्स स्कूल में गेट का निर्माण करवा चुके हैं। वहीं, दादी गौरी व गोगाजी खेल स्टेडियम में ट्रैक निर्माण में भी इनका योगदान रहा है। इनके अलावा तरुण भगवान वाल्मीकि मंदिर व बाबा पीर मंदिर में भी अपना भरपूर सहयोग एवं योगदान कर चुके हैं। तरुण राठौड़ निस्वार्थ भाव से सन्तों और सनातन की सेवा कर रहे हैं। वह बवानी खेड़ा क्षेत्र के लिए कुछ अनोखा और निस्वार्थ भाव से कार्य करने का प्रयास कर रहे हैं।
अपने आप में अनोखा है रथ और सात श्वेत अश्वों का रहस्य
सनातन धर्म के ऐतिहासिक स्रोतों में गायत्री, वृहती, उष्णिक, जगती, त्रिष्टुप, अनुष्टुप और पंक्ति नाम के सात श्वेत अश्वों का वर्णन मिलता है। यह सात श्वेत अश्व भगवान सूर्य के रथ को खिंचते है। पुराणों के अनुसार इस रथ का विस्तार नौ हजार योजन और धुरा डेढ़ करोड़ सात लाख योजन लंबा है। रथ के पहियों को संवत्सर कहा जाता है, जिनमें छह ऋतुएं नेमी के रूप में लगी होती है वहीं, बारह मास इसमें आरे के रूप में स्थित है। वहीं, वैज्ञानिकों का मत है कि इतिहास में सूर्य में वहन करने वाली सात किरणें जो इंद्रधनुष बनती है, इन्हें सात श्वेत अश्व कहा गया होगा, लेकिन वैज्ञानिक का जो भी मत हो भगवान सूर्य सनातन धर्म में विशेष स्थान और महत्व रखते हैं।
बवानीखेड़ा संतों की नगरी है। इसको दादू नगरी के नाम से भी जाना जाता है। भगवान सूर्य में सनातन धर्म को मानने वालों की गहरी आस्था है। सनातन धर्म में दिन की शुरुआत भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर होती है। बवानीखेड़ा को स्वच्छ सुंदर और श्रद्धा की नगरी बनते हुए देखना मेरा सपना है। मैं अपनी जन्मभूमि और सनातन की सेवा और क्षेत्र के विकास के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने के लिए तैयार हूं। क्षेत्र में जहां भी मेरी जरूरत होंगी में हमेशा आगे खड़ा रहूंगा।
-तरुण राठौड़, समाजसेवी, बवानीखेड़ा निवासी।