पर्यावरण और वन्य प्राणी जीवों को लेकर लोगों के दिलों में अभी वह प्यार नहीं जागृत हुआ है, जिसकी हम उम्मीद लगा रहे हैं। यही वजह है कि हरियाणा के भिवानी में चिड़ियाघर में वन्य प्राणी जीवों के प्रति अपना स्नेह और प्यार जताने के लिए कोई भी व्यक्ति पिछले तीन साल से इन्हें गोद लेने के लिए आगे नहीं आया।
भिवानी के चिड़ियाघर में निशाचर, मांसाहारी और शाकाहारी वन्य जीव हैं। इनमें सबसे महंगी खुराक टाइगर और दरियाई घोड़े की है, जबकि जावा चिड़िया और लव बर्ड की खुराक सबसे सस्ती है। चिड़ियाघर की चहल-पहल में हाल ही में आए नर शेर शिवा की वहां की मादा शेर गीता और सुधा के साथ अभी दोस्ती नहीं हुई है।
वन्य प्राणी विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी वन्य जीव को उसकी खुराक का सालाना और मासिक खुराक का खर्च उठाकर गोद लिया जा सकता है। मगर अब तक वन्य जीवों के प्रति इस तरह का स्नेह किसी ने नहीं दिखाया है। भिवानी का चिड़ियाघर दस एकड़ के दायरे में फैला है, जहां कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षी व खूंखार जंगली जानवर हैं।
इनमें घड़ियाल, दरियाई घोड़ा, मगरमच्छ, शेर, टाइगर, हिरन, तेंदुआ, काला भालू शामिल है। इन सभी जीवों का वन्य प्राणी विभाग ने गोद देने के लिए बाकायदा रेट लिस्ट भी जारी की हुई है। जिसके अनुसार लोग अपने सामर्थ्य के अनुसार इनकी खुराक का खर्च उठा सकते हैं, ताकि इन वन्य जीवों के प्रति लोगों का जुड़ाव बने और इनके प्रति लोगों की रुचि भी बढ़े। पिछले करीब दो साल से कोरोना की वजह से चिड़ियाघर बंद रहा। फिलहाल भी इसे कर्मचारियों की कमी की वजह से बंद रखा गया है।
घड़ियाल के बाड़े में दो वयस्क और आठ बच्चे
चिड़ियाघर में घड़ियाल के बाड़े की चहल पहल भी बढ़ गई हैं, क्योंकि इसमें दो वयस्क नर और मादा के अलावा आठ बच्चों का कुनबा हो गया है। घड़ियाल का वयस्क जोड़ा पीपली के चिड़ियाघर से 2009 में यहां लाया गया था।
अभी गीता और सुधा के मन नहीं भाया नर शेर शिवा
चिड़ियाघर में बब्बर शेर के बाड़े में सन्नाटा छाया है, क्योंकि हाल ही में इंदौर के चिड़ियाघर से लाया गया नर शेर शिवा यहां की शेरनी गीता और सुधा के मन नहीं भाया है। फिलहाल उसे अलग ही रखा गया है। हालांकि चिड़ियाघर प्रशासन उनके आपस में घुलने मिलने देने के मौके भी दे रहा है, मगर उनके पास आने पर झड़प का खतरा भी बना हुआ है। इसलिए एहतियातन उन्हें अलग रखना ही बेहतर विकल्प है।
तेंदुआ के बाड़े में नहीं गूंजी नन्हें शावक की गुर्राहट
चिड़ियाघर में तेंदुआ का बाड़ा भी है। इसमें कई सालों से नन्हे शावक की गुर्राहट नहीं गूंजी है। क्योंकि नर तेंदुआ सन्नी 16 साल का हो चुका है। उसे 2012 में हिमाचल प्रदेश के शिमला चिड़ियाघर से यहां लाया गया था, जबकि मादा तेंदुआ सोनिया छत्तबीड़ पंजाब के चिड़ियाघर से 2019 में यहां लाई गई थी। फिलहाल रोहतक के चिड़ियाघर से युवा तेंदुआ लाने की तैयारी चल रही है।
भालू प्रीतो व डूको भी अकेले
भालू के बाड़े में मादा भालू प्रीतो और नर काला भालू डूको हैं। इन्हें हिमाचल प्रदेश के चिड़ियाघर से 2019 में यहां लाया गया था। इनके बाड़े में भी अभी कोई नया मेहमान नहीं आया है।
41 चीतल और दो सांभर
चिड़ियाघर में हिरन के बाड़े में 41 चीतल और दो सांभर हैं। यहां लगातार परिवार बढ़ रहा है। इन्हें फिलहाल कोई गोद लेने नहीं आया है, क्योंकि इन्हें खुराक के लिए गोद देने के लिए चिड़ियाघर प्रशासन ने विकल्प खोल रखे हैं।
ये है वन्य जीवों को गोद देने के लिए राशि
चिड़ियाघर में वन्य जीवों के प्रति लोगों का लगाव बढ़ाने के लिए उन्हें गोद देने की योजना भी है, मगर तीन सालों से कोई इन्हें गोद लेने नहीं आया है। पहले तो कोविड वजह बनी, अब विकल्प खुले हैं तो कोई सामने नहीं आ रहा है। सबसे महंगी खुराक टाइगर और दरियाई घोड़े की है। वन्य जीवों को गोद लेने के लिए सालाना व मासिक राशि तय की गई है।
वन्य प्रजाति वार्षिक मासिक
- टाइगर 360000 30000
- लोमड़ी 52000 4500
- उल्लू 12000 1000
- मगरमच्छ 38000 3200
- घड़ियाल 38000 3200
- दरियाई घोड़ा 141000 12000
- चीतल हिरन 22500 2000
- सांभर 22500 2000
- चिंकारा हिरन 22500 2000
- काला भालू 50000 4200
- काला हिरन 22500 2000
- सिल्वर तीतर 1000 100
- जंगली मुर्गा 1000 100
- कॉकटेल पक्षी 1000 100
- जावा चिड़िया 600 50
- लव बर्ड 600 50
- गिरिगर पक्षी 600 50
सालाना या मासिक तौर पर भी कर सकते हैं भुगतान
चिड़ियाघर को जल्द खोलने की तैयारी चल रही है। वन्य जीवों को गोद देने के लिए चिड़ियाघर में रेट लिस्ट लगाई हुई है। फिलहाल वन्य जीवों को गोद लेने के लिए अब तक किसी ने रुझान नहीं दिखाया है। कोई भी व्यक्ति इनकी खुराक के हिसाब से सालाना और मासिक तौर पर राशि का भुगतान कर गोद ले सकता है। - निरीक्षक ज्योति कुमार, प्रभारी, चौ. सुरेंद्र सिंह मेमोरियल चिड़ियाघर भिवानी।