फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जनमंच : विषयों के बोझ से मिले छुटकारा, कक्षा में बैठ बढ़े विद्यार्थियों का ज्ञान

Sat, 10 Feb 2024 11:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
विज्ञापन
​भिवानी के डॉ. बुद्धदेव आर्य।
विज्ञापन
भिवानी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की सिफारिशों के तहत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के शैक्षणिक ढांचे में कक्षा 10वीं में दस विषय पढ़ने होंगे। इनमें सात विषय और तीन भाषाएं शामिल हैं। कक्षा 12वीं में छह विषय पढ़ने होंगे। इनमें चार विषय और दो भाषाएं शामिल होंगी। वह 12वीं कक्षा के लिए तो फायदेमंद रहेगा पर कक्षा दसवीं के लिए ज्यादा कारगर होने वाला नहीं है। क्योंकि कक्षा दसवीं के सभी विद्यार्थियों का अधिगम स्तर इतना ऊंचा नहीं होता कि वे इन दस विषयों की पढ़ाई का बोझ उठा सकें।
विज्ञापन

कक्षा दसवीं में पढ़ने वाले विद्यार्थी की उम्र महज 14 से 15 साल होती है। वह मानसिक तौर पर भी परिपक्व नहीं होता और उस पर पहले से ही छह विषयों के पाठ्यक्रम का भार होता है। ऐसे में विद्यार्थियों पर विषयों का बोझ कम कर उससे छुटकारा दिलाया जाए और कक्षा में बैठ विद्यार्थियों का ज्ञान बढ़ाने पर ध्यान हो।


दस विषय के पाठ्यक्रम के बोझ से बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर कुप्रभाव पड़ेगा। कक्षा 12वीं में छह विषय पढ़ाने का जो बदलाव किया जा रहा है, वह विद्यार्थियों के लिए फायदेमंद और कारगर रहेगा। कक्षा 12वीं के बाद विभिन्न कोर्सों की प्रवेश और प्रतियोगिता परीक्षाओं में यह बदलाव विद्यार्थियों के लिए लाभदायक रहेगा। शैक्षणिक ढांचे में इस तरह का बदलाव करने से पूर्व सरकार को इन विषयों को पढ़ाने वाले अध्यापकों और अनुकूल सुविधाओं का पर्याप्त प्रबंधन कर लेना चाहिए। -रमेश बूरा, शिक्षाविद एवं पूर्व प्राचार्य।
विज्ञापन



एनईपी की सिफारिशों के तहत सीबीएसई के शैक्षणिक ढांचे में विषय बढ़ाना विद्यार्थियों पर अनावश्यक दबाव बढ़ेगा। हालांकि विद्यार्थी को रुचि के अनुसार विषय चयन का विकल्प भी मिलेगा, लेकिन विद्यार्थी पर सभी विषयों को एक साथ लेकर चलने का भी दबाव हमेशा रहेगा। शिक्षा नीति में ऐसे विकल्पों को बढ़ावा देना बेहतर रहेगा, जिससे विद्यार्थी आसानी से अधिक ज्ञान अर्जित कर सके। स्कूली जीवन में काफी तनाव तो विषयों को लेकर ही विद्यार्थी पर बना रहता है। कॉलेज की पढ़ाई में ऐसा बहुत कम होता है। सरकार को नीति लागू करने से पहले उसके दुष्प्रभावों पर भी विचार करना जरूरी है। -डॉ. बुद्धदेव आर्य, पूर्व प्राचार्य एवं शिक्षाविद।




10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम और पढ़ाई के तौर तरीके भी भिन्न हो जाते हैं, क्योंकि 10वीं तक विद्यार्थी के पास काफी विषय रहते हैं जबकि 12वीं में उसकी रुचि के अनुसार चुनिंदा विषय ही रहते हैं। किसी भी शिक्षा नीति की सफलता विद्यार्थियों के अंदर ज्ञान अर्जित करने की जिज्ञासा बढ़ाने और पढ़ाई के तौर तरीके पर निर्भर करती है। विषयों को बढ़ाने से जरूरी नहीं कि विद्यार्थियों का ज्ञान बढ़ेगा बल्कि जो विषय विद्यार्थियों को पढ़ाए जाएं उन्हें बच्चा जरूर पढ़कर अपनी जानकारी बढ़ाए यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। -धर्मबीर सिंह आर्य, प्रबुद्ध नागरिक एवं समाजसेवी।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें