भिवानी। आज का युग विज्ञान का युग है। जहां आज प्रत्येक बच्चे, जवान, बूढ़े, महिलाएं सभी के हाथ में मोबाइल देखने को मिल जाएगा और मोबाइल में भी इंटरनेट अब अनिवार्य हो गया है और अगर वही बंद हो जाएगा तो मोबाइल महत्व बहुत कम हो जाएगा। आज प्रत्येक कार्य चाहे वो विद्यार्थियों की पढ़ाई हो, दुकानदारों का पेमेंट हो, बैंक के कार्य हो, पोस्ट ऑफिस के कार्य हो आदि सभी इंटरनेट पर हो रहे हैं। इंटरनेट सेवाओं को बंद करना उचित नहीं है। सरकार का इसका कोई समाधान ढूंढना चाहिए। यह बात शहरवासियों ने जनमंच के माध्यम से कहीं।
आज बच्चे अपने परीक्षा की तैयारी भी ऑनलाइन करते हैं और यह सब इंटरनेट से ही संभव है। अगर आपको बाहर जाना है तो भी गूगल का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में सरकार आंदोलन की आड़ में इंटरनेट बंद कर देती है तो लोगों का बहुत परेशानी होती है। इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। सरकार को इंटरनेट बंद करने के बजाय इसका कोई और समाधान ढूंढना चाहिए है ।
-संदीप वधवा , सेक्टर 13, भिवानी
किसान आंदोलन के दौरान इंटरनेट की व्यवस्था को बंद कर दिया तो यह सरकार का एक उचित कदम है, क्योंकि इससे दंगे फैलने का डर रहता है। जान मन का खतरा बना रहता है, इसलिए इंटरनेट को बंद करना ही उचित है। इंटरनेट से ही कई सोशल साइट्स के माध्यम से आंदोलन बढ़ाते हैं और सरकारी संपत्ति व प्राइवेट संपत्ति दोनों को ही खतरा होता है, इसलिए जब इंटरनेट बंद होगा तब फेसबुक व्हाट्सएप और मैसेज द्वारा सब ब्लॉक हो जाएंगे और एक-दूसरे को संदेश भी ब्लॉक हो जाएंगे।
- त्रिलोक गाबा, पीजीटी कंप्यूटर साइंस दिनोद
किसी भी आंदोलन व हिंसा के समय इंटरनेट सेवाओं पर सबसे पहले ब्रेक लगता है। ऐसा करना सरकार की भले ही मजबूरी है, लेकिन इससे लोगों के जीवन पर व्यापक असर पड़ता है। आज हर कोई इंटरनेट के युग में जी रहा है। हर किसी का काम इंटरनेट के सहारे चलता है। अगर इस सेवा में तनिक भी व्यवधान आता है तो हर तरफ नुकसान की आशंका रहती है। बच्चे घर बैठे ऑनलाइन पढ़ाई करते हैं, व्यापारी अपना ऑनलाइन लेनदेन करते हैं और तकनीकी से हर सुविधा भी ऑनलाइन जुड़ी है। सरकार को इंटरनेट बंद करने के बजाय उपद्रव व आंदोलनों से निपटने का कोई और विकल्प अपनाना चाहिए ताकि आम जनता प्रभावित न हो।
-रमेशचंद्र बूरा पूर्व प्राचार्य एवं प्रबुद्ध नागरिक