भिवानी। महर्षि वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष्य में हनुमान जोहड़ी मंदिर में चल रहे सात दिवसीय श्रीराम कथा प्रेम यज्ञ में रविवार को कथावाचक हनुमान दास महाराज ने भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का दिव्य प्रसंग सुनाया जिससे भक्तों के हृदय भक्ति और भाव से भर उठे। कथा के दौरान उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन प्रसंगों का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथा का संचालन बालयोगी महंत चरणदास महाराज के पावन सान्निध्य में किया जा रहा है। पुजारी ध्यानदास महाराज ने बताया कि यह धार्मिक अनुष्ठान सात दिनों तक चलेगा और 13 अक्तूबर को भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक प्रसंग के साथ कथा का समापन होगा। इसके उपरांत श्रीराम यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
कथावाचक हनुमान दास महाराज ने कथा में बताया कि भगवान श्रीराम अयोध्या से मुनि विश्वामित्र के साथ आश्रम की ओर प्रस्थान करते हैं। मार्ग में उन्होंने ताड़का वध कर ऋषियों को आतंक से मुक्त कराया। विश्वामित्र के कहने पर श्रीराम और लक्ष्मण ने यज्ञ की रक्षा की और मारीच जैसे राक्षसों का वध कर यज्ञ को सफल बनाया। इसके बाद जनकपुरी से निमंत्रण मिलने पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और मुनि विश्वामित्र सहित ऋषि-मुनि जनकपुरी पहुंचे।
महाराज ने जनकपुरी में राम-सीता के प्रथम मिलन का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि पुष्प वाटिका में माता सीता गौरी पूजन कर मन ही मन श्रीराम को अपने वर के रूप में चाह रही थीं, वहीं श्रीराम ने गुरु पूजा कर वधू-सौभाग्य की कामना की। उन्होंने कहा कि यह मिलन वासना से नहीं बल्कि उपासना से हुआ था। सनातनी परंपरा में कन्या गौरी पूजा और युवक गुरु पूजा कर जीवन के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
इस अवसर पर बालयोगी महंत चरणदास महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा में राम राज्याभिषेक का प्रसंग अत्यंत मंगलमय, हृदयस्पर्शी और आध्यात्मिक अर्थों से परिपूर्ण है। यह प्रसंग आदर्श जीवन, मर्यादा, प्रेम, भक्ति और धर्म के संगम का संदेश देता है। इस मौके पर डॉ. सुरेंद्र, चेयरमैन हनुमंत, सुरेश, बाबूलाल, अश्विनी कुमार सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।