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बाल सेवा आश्रम के पूर्व सचिव की बहुचर्चित हत्या में तीन को सुनाई आजीवन कठोर कारावास की सजा

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शहर के प्रमुख समाजसेवी, सर्राफा व्यापारी और बाल सेवा आश्रम के पूर्व सचिव नरेंद्र प्रभाकर हत्याकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पूर्व सरपंच व उसके भतीजे सहित एक अन्य दोषी को उम्रकैद और आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अभियुक्तों पर न्यायालय ने एक लाख दस हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। जुर्माना राशि न भरने पर उन्हें तीन साल अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। बता दें कि 20 दिसंबर 2015 को नरेंद्र प्रभाकर का अपहरण के बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। इस संबंध में बवानीखेड़ा पुलिस थाना में हत्या का केस दर्ज किया था।
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न्यायालय में पेश किए चालान के अनुसार 20 दिसंबर 2015 की रात को शहर के प्रमुख समाजसेवी, सर्राफा व्यापारी एवं बाल सेवा आश्रम के पूर्व सचिव नरेंद्र प्रभाकर का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप गांव मुंढाल के पूर्व सरपंच चरण व उसके भतीजे सुनील पर लगा था। जिन्होंने बदमाश हंसराज उर्फ हनी के साथ मिलकर नरेंद्र प्रभाकर की हत्या करा दी थी और फिर शव को खुर्द बुर्द करने के लिए गांव पुर के एक खेत में जलाया था। इस बहुचर्चित हत्याकांड में बवानीखेड़ा पुलिस ने हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। हत्याकांड में शामिल तीनों आरोपियों को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनी यादव की अदालत ने 20 अगस्त को दोषी करार दिया था। सोमवार को अदालत ने इस मामले में तीनों को उम्रकैद और कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
इन धाराओं के तहत मिली सजा
अदालत ने तीनों आरोपियों को हत्या मामले में उम्रकैद व प्रत्येक पर 50 हजार रुपये जुर्माना किया है। अपहरण मामले में धारा 364 के तहत प्रत्येक को दस साल का कठोर कारावास व 50 हजार रुपये का जुर्माना की सजा सुनाई है। इसी तरह आपराधिक षड्यंत्र की धारा 120 बी के तहत तीनों को आजीवन कठोर कारावास व 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने साक्ष्य मिटाने के अपराध की धारा 201 के तहत तीनों को सात साल की सजा व दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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ये था पूरा मामला
गांव मुंढाल खुर्द के पूर्व सरपंच चरण के साथ नरेंद्र प्रभाकर का करोड़ों रुपयों का लेन-देन था। इसी को लेकर आरोपियों ने नरेंद्र प्रभाकर की हत्या की साजिश रची थी। इस हत्याकांड में आरोपी पूर्व सरपंच का भतीजा सुनील व हंसराज हनी भी शामिल था। बवानीखेड़ा पुलिस को गांव पुर निवासी विनोद ने सूचना दी थी। विनोद ने दिलबाग के पुर से तालू रोड पर चार एकड़ जमीन बंटाई पर ले रखी थी। उसके खेत में नरमा की एक एकड़ की सूखी लकड़ी पड़ी थी। इसी पर नरेंद्र प्रभाकर के शव को आरोपियों ने जलाकर शव को खुर्द-बुर्द करने का प्रयास किया था। बवानीखेड़ा पुलिस ने अधजला शव बरामद कर उसकी शनाख्त नरेंद्र प्रभाकर के रूप में कराई थी।
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