गांव के जोहड़ में गम्बुजिया मछली डालते स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी।
तोशाम। एसडीएम रवि मीणा ने वर्षा के कारण मच्छरों से उत्पन्न होने वाली बीमारियों को लेकर लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता बताई। इस समय मच्छर जनित बीमारियों के बढ़ने की आशंका रहती है लेकिन नागरिक सावधानी बरतकर इन बीमारियों से बच सकते हैं। गांव दांग खुर्द, दांग कलां, सांगवान और बीरान में स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया। जहां-जहां पानी जमा था वहां गंबुजिया मछली छोड़ी गई और काला तेल, डीजल ऑयल डाला गया ताकि मच्छरों के लार्वा नष्ट किए जा सकें। एसडीएम ने कहा कि बरसाती पानी से घिरे गांवों में डेंगू और मलेरिया की रोकथाम करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए लगातार फील्ड में काम कर रही है। घर-घर एंटी लारवा एक्टिविटी जारी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्थायी पानी के स्रोतों की पहचान कर गंबुजिया मछली डलवाई गई जो लार्वा खाने का काम करती है। ग्रामीणों की ओपीडी के आधार पर जांच की गई और आवश्यक दवाइयां वितरित की गईं। विभाग का उद्देश्य ग्रामीणों को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना और मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम करना है।
डेंगू से बचाव के उपाय
एसएमओ सुधीर ने कहा कि घर में कहीं भी पानी खड़ा न रहने दें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें और रात को सोते समय मच्छरदानी या मोस्किटो रिपेलेंट का प्रयोग करें। बुखार आने पर नजदीकी सरकारी या अन्य अस्पताल में जाकर उचित इलाज करवाएं। प्लेटलेट्स कम होने पर उन्हें तुरंत सुरक्षित अस्पताल में ले जाएं। एडीज मच्छर के काटने के चार-पांच दिन में पीड़ित को तेज बुखार होता है। कई बार बुखार के साथ इतना दर्द होता है कि इसे सामान्य भाषा में “हड्डी तोड़ बुखार” कहा जाता है। भूख न लगना, उल्टी-दस्त, गले में खराश, पेट दर्द और लीवर में सूजन इसके अन्य लक्षण हैं।