भिवानी। खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन योजनाओं से काम नहीं चलेगा। धरातल पर भी खिलाड़ियों के लिए मूलभूत सुविधाएं जुटाना जरूरी है, जिनकी उन्हें तत्काल आवश्यकता है। खिलाड़ियों के लिए ग्राम स्तर पर खेल मैदान तो हैं, मगर खेल प्रशिक्षक नहीं हैं। जिला मुख्यालय के खेल स्टेडियम में भी कई खेलों के तो खेल प्रशिक्षक ही नहीं हैं, ऐसे में खिलाड़ी अपना खेल कौशल कैसे निखारेंगे और कैसे मेडल जीतकर लाएंगे। खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त खेल प्रशिक्षक और खेल संसाधन बहुत जरूरी हैं, इन्हें पूरा करने के लिए सरकार को ध्यान देना चाहिए। ये बात जनमंच कॉलम के माध्यम से शहर प्रबुद्धजनों ने कहीं।
हरियाणा में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। बस आवश्यकता है तो उन प्रतिभाओं को उभारने की। भिवानी खेलों के मामले में खेल हब माना जाता है। प्रत्येक गांव में खिलाड़ी आपको तैयारी करते हुए देखे जा सकते हैं। बस आवश्यकता है तो उनको सही प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की। खिलाड़ियों को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए वह सरकार उनको पूरी तरह उपलब्ध नहीं कर पा रही हैं। अगर खिलाड़ियों को सभी सुविधाएं सही समय पर उपलब्ध हों तो हमारे खिलाड़ी न केवल देश स्तर पर बल्कि एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और ओलंपिक खेलों में बहुत अधिक पदक ला सकते हैं।
- संदीप वधवा, सेक्टर 13 निवासी।
हरियाणा सरकार खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए काफी योजनाएं चला रही हैं, लेकिन धरातल पर अधिकारी इन योजनाओं को खिलाड़ियों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के खेल मैदानों की हालत सुधार उनमें खिलाड़ियों का नियमित खेल अभ्यास कराया जाए तो बेहतर खिलाड़ी तैयार होंगे, जिन्हें खेल प्रशिक्षकों का उचित मार्गदर्शन मिलने पर वे जिले के लिए मेडल जाएंगे। ग्रामीण स्तर पर खेल स्टेडियम की सुविधा भी बढ़ाई जाएं ताकि बेहतर खिलाड़ी तैयार हो सकें।
- रीतिक वधवा, सामाजिक कार्यकर्ता।
कहने को तो हरियाणा सरकार ने गांव, शहरों में स्टेडियम बनाए हुए हैं। लेकिन स्टेडियम में सारी सुविधाएं न होने के कारण प्रतिभाएं वहीं दम तोड़ देती हैं। खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए न तो वहां कोच है न उनको मार्गदर्शन करने के लिए योग्य व्यक्ति हैं। सरकार को चाहिए कि अगर प्रतिभाओं को उभारना है तो अधिक से अधिक कोचों की भर्ती करें। खेल सामग्री प्रत्येक स्टेडियम में उपलब्ध कराये और साथ-साथ खिलाड़ियों को खान-पान की सुविधाएं भी उपलब्ध कराएं। इससे हरियाणा देश-विदेश में अपनी प्रतिभाओं से पदक ला सके।
- रमेश बूरा, पूर्व प्राचार्य।