भिवानी के नागरिक अस्पताल में स्थित जच्चा बच्चा वार्ड।
भिवानी। जिला नागरिक अस्पताल के स्टाफ की कथित लापरवाही से एक महिला दर्द से कराहती रही, लेकिन उसे समय पर भर्ती न किया जा सका और उसने पालना गृह के पास बच्चे का जन्म दे दिया। इसकी भनक अस्पताल प्रशासन को लगी तो तत्काल प्रभाव से महिला और नवजात शिशु को उपचार के दायरे में लाया गया।
बच्चे को नीकू वार्ड में भेजा गया जबकि महिला को जच्चा वार्ड में दाखिल किया गया। सभी तरह की जांच के बाद नवजात बच्चे को रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। वहीं महिला का जिला नागरिक अस्पताल के जच्चा वार्ड में उपचार चल रहा है। महिला की प्री मैच्योर डिलीवरी बताई जा रही है। महिला को पहले डेढ़ साल का लड़का है।
मूल रूप से मध्यप्रदेश के पंचमखेड़ा के टिकमगढ़ की रहने वाली सुधा (22) को डिलीवरी के लिए परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उसके साथ उसकी सास जानकी भी थी। महिला को जच्चा वार्ड में घुसते ही पहले खून जांच कराने के लिए भेज दिया। इसके बाद उसे अन्य जांच के लिए भी काफी देर तक इधर-उधर दौड़ाया गया। महिला को जब दर्द बढ़ने लगा तो वह थककर ब्लड बैंक के सामने पालना गृह के पास ही खड़ी हो गई। इसी दौरान उसने नवजात को जन्म दे दिया। महिला की खुले में डिलीवरी होने की भनक अस्पताल के जच्चा वार्ड के कर्मचारियों को लगी तो वे तुरंत दौड़े और नवजात शिशु व महिला को अंदर लेकर आए। दोनों का तत्काल उपचार शुरू किया।
जानकी ने बताया कि उसके बेटे सौरभ की सुधा से करीब चार साल पहले शादी हुई थी। सौरभ का पहले डेढ़ साल का लड़का है। सुधा को सुबह अचानक दर्द शुरू हो गया था, तब वह उसे यहां लेकर आई थी, मगर जच्चा वार्ड में उन्हें कभी इधर तो कभी उधर भेजा और उसकी बहू को दाखिल नहीं किया। इस दौरान बहू दर्द से कराह रही थी। इसी दौरान पालना गृह के पास उसने बच्चे को जन्म दे दिया।
महिला की प्री मैच्योर डिलीवरी हुई है। फिलहाल महिला और नवजात बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है। कुछ जरूरी जांचें और टीकें लगाने अनिवार्य हैं, जिसके लिए नवजात शिशु को रोहतक पीजीआई भेजा गया है, जबकि महिला को जच्चा वार्ड में दाखिल कराया गया है। इससे पहले महिला ने गर्भवती होने की कोई जांच नहीं कराई थी। इसलिए टेस्ट अनिवार्य हैं। महिला नॉर्मल आई थी, अचानक ही उसे डिलीवरी हुई है। - डॉ. दशरथ राव, कार्यवाहक, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, भिवानी।