राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हरियाणा के भिवानी की धरा पर कदम रखकर यहां के लोगों के दिलों में स्वराज पाने की ललक जगा दी थी। जिसका परिणाम यह हुआ कि गांधी जी के आजादी के कई बड़े आंदोलनों में भिवानी के महापुरुषों की भूमिका भी अहम रही। इन्हीं में भिवानी के लाल थे पंडित नेकीराम शर्मा। पंडित नेकीराम शर्मा के अनुरोध पर ही महात्मा गांधी जी भिवानी में दो बार पहुंचे थे।
देश की आजादी में असहयोग आंदोलन भी अहम था। गांधी जी ने भिवानी आगमन पर असहयोग आंदोलन की रूपरेखा के बारे में जिले के लोगों को रूबरू कराया था। यहां के लोग भी स्वदेशी के प्रति काफी नजदीक आए। यही वजह रही कि भिवानी में आज भी खादी के कई ऐसे पुराने भंडार हैं, जहां गांधी जी के आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर इतिहास की गवाह बनी है।
गांधी वादी विचारधारा से प्रेरित लोगों में भिवानी के पंडित नेकीराम शर्मा भी थे। जिन्हें हरियाणा केसरी का खिताब भी मिला। जिनकी भिवानी के घंटाघर चौक पर आदमकद प्रतिमा लगी है। नेकीराम शर्मा की बदौलत भिवानी में गांधी जी का दो बार आगमन हुआ। उनके अभिनंदन ग्रंथ में गांधी जी से जुड़े कई संस्मरणों का जिक्र है। स्वतंत्रता सेनानी पंडित नेकीराम शर्मा के परपौत्र पराग शर्मा ने बताया कि भिवानी में पंडित नेकीराम शर्मा के आमंत्रण पर राष्ट्र पिता महात्मा गांधी भिवानी पहुंचे थे। जमीन पर बैठकर सम्मेलन की शुरुआत भिवानी से हुई थी। उसका आज तक अनुसरण हो रहा है। पंडित नेकीराम गांधी जी की इस बात से काफी प्रभावित हुए थे कि पार्टी में कोई छोटा बड़ा नहीं होता, सभी एक समान हैं। इसीलिए सभी एक साथ जमीन पर बैठकर सम्मेलन में मंत्रणा करते थे। देश की आजादी के आंदोलनों में पंडित नेकीराम और भिवानी के लोगों का भी अहम योगदान रहा है।
भिवानी का पंडित नेकीराम शर्मा पुस्तकालय की स्थापना भी 1955 के आसपास हुई थी। उसी समय महात्मा गांधी की आदमकद प्रतिमा को भी पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने बतौर केंद्रीय यातायात मंत्री के तौर पर इसका शुभारंभ किया था। संगमरमर से बनी गांधी जी की ये प्रतिमा जीवंत है। पुस्तकालय में काफी ऐसे अभिनंदन ग्रंथ और पुस्तकें हैं, जिनमें गांधी जी के भिवानी आगमन का जिक्र ही नहीं बल्कि घटनाक्रम भी दर्ज हैं। -देवेंद्र सिंह, पूर्व जिला लाइब्रेरियन, पंडित नेकीराम शर्मा पुस्तकालय भिवानी।