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पुण्यतिथि पर विशेष: गांधी जी ने भिवानी से लोगों के दिलों में जगाई थी स्वराज पाने की ललक

Sun, 30 Jan 2022 04:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह संजय वर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)

सार

दरी पर बैठ सम्मेलन की शुरुआत हुई थी तो सेठ भी देश की आजादी के लिए दिल खोल आर्थिक सहयोग के लिए तैयार हुए थे। महात्मा गांधी की बदौलत आजादी के कद्दावर नेता भिवानी में पहुंचे थे।
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महात्मा गांधी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हरियाणा के भिवानी की धरा पर कदम रखकर यहां के लोगों के दिलों में स्वराज पाने की ललक जगा दी थी। जिसका परिणाम यह हुआ कि गांधी जी के आजादी के कई बड़े आंदोलनों में भिवानी के महापुरुषों की भूमिका भी अहम रही। इन्हीं में भिवानी के लाल थे पंडित नेकीराम शर्मा। पंडित नेकीराम शर्मा के अनुरोध पर ही महात्मा गांधी जी भिवानी में दो बार पहुंचे थे।

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जिनके साथ आजादी के आंदोलन में कई कद्दावर नेताओं से भी भिवानी वासी सीधे रूबरू हो सके थे। इनमें अली बंधु और लाल बहादुर शास्त्री के नाम अहम हैं। रविवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 74वीं पुण्यतिथि पर हर कोई उन्हें नमन कर उनके योगदान को याद कर रहा है। 

गांधी जी के भिवानी आगमन के सौ साल बाद भी स्वतंत्रता सेनानी पंडित नेकीराम शर्मा पुस्तकालय सभागार परिसर में महात्मा गांधी की आदमकद प्रतिमा इतिहास की गवाह बनी है। गांधी जी की इस प्रतिमा को भिवानी में 30 जनवरी 1955 में तत्कालीन केंद्रीय यातायात मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने स्थापित कराया गया था। हरियाणा केसरी पंडित नेकीराम शर्मा की पुस्तक में इस बात का भी उल्लेख है कि महात्मा गांधी 22 से 24 अक्तूबर 1920 में भिवानी सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे थे।
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22 अक्तूबर को महात्मा गांधी ट्रेन से भिवानी रेलवे स्टेशन पर पहुंचे थे। गांधी जी का काफिला भिवानी शहर में भी घूमा था। सैकड़ों लोगों की भीड़ गांधी जी का अभिवादन करने घरों की छतों और गलियों में जुटी थी। उनके साथ शौकत अली, मोहम्मद अली, स्वामी सत्यदेव, कस्तूरबा गांधी भी थीं।  उस समय महात्मा गांधी ने भिवानी वासियों में स्वराज पाने और आजादी की सीख भी दी, जिसकी बदौलत भिवानी वासियों ने गांधी जी को हर तरह से सहयोग का न केवल आश्वासन दिया, बल्कि सामर्थ्य के अनुसार आंदोलन के लिए आर्थिक योगदान भी देने का हर संभव भरोसा दिलाया था। इसके बाद महात्मा गांधी 16 फरवरी 1921 को भिवानी पहुंचे थे। सम्मेलन में शामिल होने के लिए राजस्थान से भी सैकड़ों लोग एक दिन पहले ही रात को भिवानी पहुंच गए थे।

असहयोग आंदोलन का भिवानी ने किया था समर्थन

देश की आजादी में असहयोग आंदोलन भी अहम था। गांधी जी ने भिवानी आगमन पर असहयोग आंदोलन की रूपरेखा के बारे में जिले के लोगों को रूबरू कराया था। यहां के लोग भी स्वदेशी के प्रति काफी नजदीक आए। यही वजह रही कि भिवानी में आज भी खादी के कई ऐसे पुराने भंडार हैं, जहां गांधी जी के आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर इतिहास की गवाह बनी है। 

 

जमीन पर बैठकर सम्मेलन की हुई थी शुरुआत

गांधी वादी विचारधारा से प्रेरित लोगों में भिवानी के पंडित नेकीराम शर्मा भी थे। जिन्हें हरियाणा केसरी का खिताब भी मिला। जिनकी भिवानी के घंटाघर चौक पर आदमकद प्रतिमा लगी है। नेकीराम शर्मा  की बदौलत भिवानी में गांधी जी का दो बार आगमन हुआ। उनके अभिनंदन ग्रंथ में गांधी जी से जुड़े कई संस्मरणों का जिक्र है। स्वतंत्रता सेनानी पंडित नेकीराम शर्मा के परपौत्र पराग शर्मा ने बताया कि भिवानी में पंडित नेकीराम शर्मा के आमंत्रण पर राष्ट्र पिता महात्मा गांधी भिवानी पहुंचे थे। जमीन पर बैठकर सम्मेलन की शुरुआत भिवानी से हुई थी। उसका आज तक अनुसरण हो रहा है। पंडित नेकीराम गांधी जी की इस बात से काफी प्रभावित हुए थे कि पार्टी में कोई छोटा बड़ा नहीं होता, सभी एक समान हैं। इसीलिए सभी एक साथ जमीन पर बैठकर सम्मेलन में मंत्रणा करते थे। देश की आजादी के आंदोलनों में पंडित नेकीराम और भिवानी के लोगों का भी अहम योगदान रहा है। 

भिवानी का पंडित नेकीराम शर्मा पुस्तकालय की स्थापना भी 1955 के आसपास हुई थी। उसी समय महात्मा गांधी की आदमकद प्रतिमा को भी पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने बतौर केंद्रीय यातायात मंत्री के तौर पर इसका शुभारंभ किया था। संगमरमर से बनी गांधी जी की ये प्रतिमा जीवंत है। पुस्तकालय में काफी ऐसे अभिनंदन ग्रंथ और पुस्तकें हैं, जिनमें गांधी जी के भिवानी आगमन का जिक्र ही नहीं बल्कि घटनाक्रम भी दर्ज हैं। -देवेंद्र सिंह, पूर्व जिला लाइब्रेरियन, पंडित नेकीराम शर्मा पुस्तकालय भिवानी। 

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