भिवानी। हरियाणा बजट से कृषि क्षेत्र में किसानों को काफी उम्मीदें हैं। बजट में कृषि के लिए एक बड़ा हिस्सा किसानों को राहत और ऋण संबंधी कार्यों के लिए होना चाहिए। किसानों की मांग है कि एमएसपी के साथ-साथ किसानों को मंडियों में अपनी फसलों को बिक्री करने के लिए भी जरूरी संसाधन जुटाए जाने बहुत जरूरी हैं। इन्हीं को लेकर बजट से पहले लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी हैं।
हरियाणा सरकार के बजट में किसानों के लिए काफी उम्मीदें हैं, क्योंकि हरियाणा कृषि प्रधान इलाका है। अधिकतर लोग यहां खेती पर ही निर्भर हैं। ऐसे में अधिकांश तबके के लिए प्रदेश के बजट में सबसे अधिक हिस्सेदारी होनी जरूरी है। किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम मिले और किसी आपदा पर नुकसान की सूरत में समय पर भरपाई हो जाए, इसका प्रावधान होना जरूरी है।
-हरिदत्त आर्य पूर्व डीपीई
किसानों के लिए प्रदेश के बजट में खास रियायतें दी जाएं। काफी इलाकों के किसान तो ऐसे हैं, जिनके पास जरूरी संसाधन तक नहीं हैं न ही सिंचाई के पानी की कोई व्यवस्था। अधिकांश ट्यूबवेल आधारित खेती करने वाले किसानों की लागत ही ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में किसानों को उनकी फसल का एमएसपी ज्यादा दिया जाए और ट्यूबवेल लगाने की लागत और शर्तों में ढील दी जाए। इसके अलावा कृषि उपकरण खरीद पर भी रियायत मिले।
-ईश्वर किसान हालुवास
प्रदेश के बजट में किसानों के लिए ज्यादा कुछ नहीं दिया जा रहा है। इसी वजह से किसानों का रुझान भी खेती से घट रहा है। सरकार को चाहिए कि कृषि को बढ़ावा देने और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए बजट में ऐसे प्रावधान जरूरी हैं, जिनसे किसानों का खेती में जोखिम बहुत कम रहे और अच्छे उत्पादन पर उन्हें वाजिब दाम मिले। कृषि क्षेत्र में संसाधन बढ़ाए जाने के लिए भी बजट में प्रावधान जरूरी हैं।
-हनुमान किसान
राज्य सरकार के बजट में किसान और खेती को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा हिस्सा निर्धारित किया जाए, ताकि खेती में लगातार हो रहे नुकसान से किसान को उबारा जा सके। वहीं किसानों को बुआई के समय से लेकर फसल बिक्री तक सुविधाएं मिलें, जिससे उसकी मुश्किलें आसान हो जाए। किसानों को बीज खरीदने से लेकर फसल बेचने तक काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, वहीं उसकी कृषि की लागत भी बढ़ रही है।
-सत्यप्रकाश किसान