भिवानी। छठ पर्व पांच नवंबर से आठ नवंबर तक मनाया जाएगा। चार दिवसीय महाव्रत और पूजा मंगलवार से शुरू होगी। इस महाव्रत की तैयारी शुरू हो चुकी है। भिवानी के जूई नहर के पास ही छठ पूजा घाट तैयार किया जा रहा है। वहां पूर्वांचलवासी परिवारों का महाकुंभ उमड़ेगा। पूजा के दौरान सुरक्षा के भी कड़े बंदोबस्त रहेंगे।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छह पर्व में व्रतधारी पूरी निष्ठा, समर्पण के साथ सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करते हैं। इस पावन पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इसके बाद खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के साथ यह पर्व संपन्न होता है। छठ पूजा के दौरान उपयोग में लाई जाने वाली सामग्री का विशेष महत्व है, जिससे पूजा संपूर्ण होती है।
छठ के पहले दिन घरों में चावल, लौकी और चने की दाल बनाई जाती है। दाल-भात के सेवन के बाद लोग अगले दिन यानी छह नवंबर को खरना की तैयारी में जुट जाएंगे। सात को संध्या अर्घ्य है। आठ को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा का समापन किया जाएगा।
कई सामाजिक संस्थाएं अभी से आयोजन की तैयारी में जुट गईं हैं। छठ पूजा घाट को संवारा जा रहा है। फिलहाल जूई नहर में भी पानी छोड़ा गया है। पर्व के दौरान महिलाएं पानी के बीच जाकर अस्तांचल और उदयांचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी। श्रद्धालु रामदीन, माया और कमला रानी आदि ने बताया कि भिवानी में करीब ढाई हजार से अधिक पूर्वांचल मूल के लोग रहते हैं जो अपने परिवार के साथ यहां पर छठ पर्व मनाएंगे।
जीतू नाथ ने संभाली सुरता माई आश्रम की गद्दी
भिवानी। हांसी रोड स्थित सुरता माई आश्रम में महंत कल्लू नाथ महाराज के ब्रह्मलीन होने के 41वें दिन रविवार को भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें बाबा गरीब नाथ सामधा धाम राजस्थान के गद्दी पीर चंदर नाथ महाराज, महंत इकसार नाथ भी शामिल हुए। महंत कल्लू नाथ के स्थान पर गांव चांग निवासी अजीत उर्फ जीतू को उनका उत्तराधिकारी घोषित किया गया। इससे सारी साध संगत ने मंजूर किया और जीतू नाथ को महंत की उपाधि देकर गद्दी पर बैठाया। इस अवसर पर एडवोकेट सुरेश मेहरा, पवन कुमार, हंसनाथ, कृष्ण कुमार, राजकुमार पूनिया, श्रीराम मेहरा, धनपत सिंह, मुख्तयार सिंह आदि मौजूद रहे।