चार साल में आठ बार भेजा मांगपत्र, नहीं मिला चिकित्सक
नवनीत शर्मा
भिवानी। जिले में विभिन्न रोगों के मरीज लगातार ही बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर चिकित्सक न होने की वजह से उन्हें ठीक से उपचार नहीं मिल पा रहे। ऐसे में समय पर उचित उपचार पाना ही मरीजों के लिए मुसीबत बन गया है। नागरिक अस्पताल में पिछले चार साल से न कोई त्वचा रोग विशेषज्ञ है और सात साल से न ही कोई मनोरोग विशेषज्ञ। हैरानी की बात तो यह है कि अस्पताल में अभी तक किसी न्यूरो विशेषज्ञ की ज्वाइनिंग ही नहीं हुई है। डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग चार साल में आठ बार पत्र मुख्यालय को भेज चुका है, लेकिन चिकित्सकों की कमी पूरी नहीं हो रही है।
अस्पताल प्रशासन द्वारा बार-बार स्वास्थ्य मुख्यालय को मांग पत्र भेजने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। ऐसे में इन रोगों के मरीजों के उपचार के लिए भी अस्पताल में कोई अन्य सुविधा नहीं है। मजबूरी में मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है, जहां पर उनको इलाज के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ते है। यह स्थिति कुछ दिन से नहीं बल्कि पिछले कई साल से बनी हुई है। अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
इन दिनों जिले में डेंगू मच्छर के डंक का प्रकोप चल रहा है। इसकी वजह से लगातार डेंगू के नए मरीज सामने आ रहे है। साथ ही जिले में वायरल बुखार के मामले भी बढ़ रहे है। इनमें से जो मरीज रिकवर हो जाते है, उनके काफी मरीजों को त्वचा संबंधित रोग जैसे दाद, खाज, खुजली या फिर शरीर में निशान पड़ने के मामले मिल रहे हैं। चिकित्सक मरीजों को तला भुना खाने से परहेज, समय पर संतुलित आहार करने और अधिक से अधिक तरल पदार्थ पीने की सलाह दे रहे हैं। नागरिक अस्पताल की त्वचा रोग विशेषज्ञ न होने के कारण फिजिशियन ही इनसे संबंधित रोगियों की जांच कर दवा दे रहे हैं। नागरिक अस्पताल में त्वचा संबंधित रोग के 15 से 20 मरीज आ रहे हैं। वहीं शहर के निजी अस्पतालों में त्वचा रोग विशेषज्ञ की ओपीडी 250 से 300 तक रहती है।
लैब में भी एलर्जी टेस्ट की नहीं सुविधा
नागरिक अस्पताल की लैब में भी एलर्जी, न्यूरो व मनोरोग से संबंधित बीमारियों के टेस्ट की सुविधा नहीं है। वैसे भी डॉक्टर द्वारा एलर्जी के मरीजों को शुरूआत में केवल जांच के आधार पर दवा दी जाती है। अस्पताल में एलर्जी के टेस्ट की सुविधा न होने के कारण मरीजों को निजी अस्पताल में जाकर जेब ढीली करनी पड़ती है। एलर्जी के लिए सभी टेस्ट अलग-अलग होते है। जिसकी शुरूआत एक हजार रुपये से लेकर इससे अधिक होती है। वहीं मनोरोग और न्यूरो के टेस्ट की लागत ओर भी अधिक है।
त्वचा रोग की ओपीडी में पर्ची काटना हुआ बंद
जानकारी के अनुसार नागरिक अस्पताल में पिछले चार साल से कोई भी त्वचा रोग विशेषज्ञ नहीं है। अब डॉक्टर के न होने से त्वचा रोग की ओपीडी पर्ची काटना ही बंद हो गई है। वही अस्पताल में पिछले सात साल से मनोरोग विशेषज्ञ भी नहीं है। चिकित्सक न होने से फिजिशियन से चेकअप करवाकर ही वापस लौट गए। वही अस्पताल की स्थापना के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक अस्पताल को कोई न्यूरो विशेषज्ञ नहीं मिला है। सरकार एक ओर नागरिक अस्पताल को अपग्रेड कर मेडिकल कॉलेज बनाने में लगी है तो दूसरी ओर अस्पताल में रोग विशेषज्ञ न होने से मरीजों को परेशानी के साथ साथ जेब ढीली करनी पड़ रही है।
पांच रोगों के नहीं विशेषज्ञ
अस्पताल लंबे समय से विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी झेल रहा है। अस्पताल में त्वचा रोग, मनोरोग, न्यूरो सर्जन, ईएनटी, बाल रोग के विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। अब अन्य रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी कमी होती जा रही हैं। रोजाना औसतन 1100 से 1200 की ओपीडी रहती है। मरीजों को मजबूरी में उपचार के लिए निजी अस्पताल या फिर पीजीआईएमएस रोहतक जाना पड़ रहा है। संवाद
वर्जन:
अस्पताल में कुछ रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सक लंबे समय से नहीं हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य निदेशालय को मांगपत्र भेजे गए हैं। उम्मीद है अस्पताल में जल्द ही इन रोगों के चिकित्सकों की सुविधा मिलेगी। अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग सदैव प्रयासरत रहता है।
- डॉ. मंजू कादियान, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, भिवानी।