हरियाणा के भिवानी में नगर परिषद में पिछले पांच साल के दौरान आई करोड़ों की विकास राशि हड़प कर नगर परिषद का निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव करोड़पति बन गया। इतना ही नहीं अकाउंटेंट, बैंक मैनेजर, फर्जी फर्म संचालक और उनके रिश्तेदार भी मालामाल हो गए। यह खुलासा पुलिस की पूछताछ में हुआ है। पूछताछ में सामने आया कि फर्जी खातों में ट्रांसफर हुई राशि में से 60 फीसदी हिस्सा (शेयर) नगर परिषद के निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव का होता था।
इसके बाद 20 फीसदी दोनों अकाउंटेंट ट्रांसफर करने के नाम पर लेते थे। बचा हुआ 20 फीसदी में विभिन्न फर्मों, मध्यस्थता करने वालों, बैंक मैनेजर का शेयर होता था। अब तक की जांच में 14.71 करोड़ की राशि के ट्रांसफर का खुलासा हो चुका है और यह राशि बढ़ती ही जा रही है।
पुलिस ने मामले में दोनों आरोपी अकाउंटेंट को गिरफ्तार किया है। गुरुवार को उन्हें कोर्ट में पेश कर चार-चार दिन के रिमांड पर लिया गया है। इनके अलावा रिमांड पर लिए गए आरोपी निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव, तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी संजय यादव ने भी कई खुलासे किए हैं। अभी पुलिस आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ घोटाले की राशि बरामद करने में जुटी है।
नगर परिषद में पूर्व पार्षद सुदर्शन जिंदल ने चेक घोटाले की शिकायत की थी। इसके बाद अब हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। दो करोड़ रुपये की राशि के घोटालों के आरोपों से शुरू हुई जांच में अब तक 14 करोड़ 71 लाख रुपये फर्जी तरीके से फर्जी फर्मों के खाते में ट्रांसफर करके घोटाला करने का खुलासा हो चुका है।
मामले में बुधवार को पुलिस ने दोनों अकाउंटेंट सुरेश कुमार और संजय बंसल को गिरफ्तार किया था। उन्हें गुरुवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को चार-चार दिन के रिमांड पर लिया गया है। दोनों विजिलेंस टीम के पास हैं और दोनों को साथ लेकर विजिलेंस टीम ने नगर परिषद से रिकॉर्ड भी कब्जे में लिया। संबंधित बैंक का रिकॉर्ड भी टीम ने अपने कब्जे में लिया है।
अब तक करोड़ों रुपये फर्जी फर्मों में ट्रांसफर के नाम पर एक प्रतिशत और दो प्रतिशत खाता धारकों व अन्य मध्यस्थता करने वालों को दिए जाने वाले खुलासे सामने आ रहे थे। अब तक नगर परिषद के निवर्तमान चेयरमैन पर घोटाले में शामिल होने और कमीशन खाने के आरोप लग रहे थे।
अब पुलिस जांच में सामने आया है कि ट्रांसफर हुई राशि में 60 फीसदी शेयर निवर्तमान चेयरमैन का होता था। यानी अब तक की पुलिस जांच में सामने आए 14.71 करोड़ के घोटाले में तो सीधे 7.36 करोड़ की राशि तो उसके हिस्से जा चुकी है। इसके अलावा वह बैंक मैनेजर से प्रति एक करोड़ की राशि एक्सिस बैंक के खाते में डालने पर 25 हजार रुपये अलग से कमीशन लेता था।
इसके अलावा अकाउंटेंट का हिस्सा ट्रांसफर हुई राशि में 20 प्रतिशत होता था। जांच में यह भी सामने आया कि अकाउंटेंट सुरेश प्रति एक करोड़ के ट्रांजेक्शन पर 20 से 25 हजार रुपये कमीशन लेता था। बाकी 20 प्रतिशत की राशि अन्य सहयोगियों, जिनमें आरोपी बैंक मैनेजर, फर्जी फर्म मालिक, फर्जी फर्म मालिकों से संपर्क कराने वालों को मिलता था।
वाराणसी, लखनऊ में छिपता रहा संजय बंसल
शुरुआती जांच के बाद से फरार चल रहा अकाउंटेंट संजय बंसल पुलिस से बचने के लिए वाराणसी और लखनऊ में अपने रिश्तेदारों के यहां छिपा था। बाद में वह दिल्ली आया, जिसकी पुलिस को सूचना मिल गई। आरोपी फिर भिवानी आया और घंटाघर चौक से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। सुरेश कुमार को भी पुलिस ने घंटाघर चौक से गिरफ्तार किया। दोनों को चार-चार दिन के रिमांड पर लिया गया है।
बैंक मैनेजर से 20 लाख रुपये बरामद
घोटाले में आरोपी एक्सिस बैंक के ब्रांच मैनेजर नितेश से पुलिस ने 20 लाख रुपये बरामद किए हैं। आरोपी से रिमांड के दौरान यह राशि बरामद की गई। आरोपी नितेश को पुलिस ने पहले दो दिन के रिमांड पर लिया था। फिर पांच दिन का रिमांड लेकर जेल भेज दिया। अब फिर से तीन दिन का रिमांड लिया था। जिसके दौरान 20 लाख की राशि बरामद हुई।
बढ़ सकती है घोटाले की राशि
स्टेट विजिलेंस टीम नगर परिषद में सामने आए घोटाले की जांच कर रही है। हमारी पुलिस टीम सहयोग में साथ है। अब तक 14.71 करोड़ रुपये फर्जी खातों में डालने का खुलासा हो चुका है। सभी आरोपी ट्रांसफर की राशि में शेयर लेते थे। इसमें नप के निवर्तमान चेयरमैन, अकाउंटेंट, फर्जी खातों के मालिक व अन्य शामिल थे। मामले की जांच चल रही है। घोटाले की राशि अभी और बढ़ सकती है। - अजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक।