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अब मेटल डिटेक्टर बताएगा कहा पेयजल लाइन है लीक, कहां सीवरेज लाइन है डेमेज

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अब मेटल डिटेक्टर बताएगा पेयजल लाइन के लीकेज, कहां सीवर के डेमेज
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संजय वर्मा
भिवानी। पेयजल पाइपों के लीकेज और सीवरेज लाइन डेमेज व ब्लॉक होने से जगह-जगह खुदाई कर परेशान जनस्वास्थ्य विभाग ने अब भू-वैज्ञानिकों की मदद लेने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब मेटल डिटेक्टर बताएगा कि पानी की लाइन कहां लीक है और सीवरेज लाइन कहां डेमेज है। सीवर लाइन कहां ब्लॉक है। आधुनिक मशीनों से पता लगेगा कि किस जगह जमीन में पानी का स्तर क्या है। जिससे लीकेज का पता लगाया जा सकेगा। इसके लिए डेमो भी किया गया और एक किलोमीटर क्षेत्र का सर्वे कर एक पुरानी लाइन भी खोजी गई।
अब इसी तर्ज पर भू वैज्ञानिकों की सहायता से आधुनिक मशीनों का प्रयोग कर पेयजल लाइन लीकेज, सीवर लाइन की ब्लॉक का पता लगाकर ठीक किया जाएगा।
शहर में 60 फीसदी सीवरेज व पेयजल लाइनों में लीकेज व ब्लॉक की समस्याएं हैं। इसका कारण है लाइन पुरानी होना। पिछले दो साल के दौरान हुई अत्यधिक बारिश के कारण भी कई जगह जमीन धंसी और लाइनों की हालत बिगड़ी रहती हैं। जिससे जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के समक्ष भी शिकायतों का अंबार लगा रहता है।
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शिकायतों के बाद लीकेज तलाशनें के लिए विभाग कर्मचारियों को अनेक जगह खुदाई करनी पड़ती है। अब इस तरह की समस्याओं से निजात दिलाने के लिए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अधिकारियों ने आईआईटी रुड़की की मदद ली है।
एक किलोमीटर की लाइन का किया डेमो
जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से इसका डेमो किया गया। जिसमें दादरी गेट की न्यू हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी गेट के सामने नेशनल हाईवे की सड़क के नीचे वर्षों से दबा एक सीवरेज मैनहोल भी ढूंढा। सर्वे के दौरान मेटल डिटेक्टर से सड़क निर्माण के दौरान जमीन के नीचे दबे पुराने सीवरेज मैनहोल को खोजे व जमीन की नमी जांचकर पाइप लाइन की लीकेज का पता लगाने व सीवरेज मैनहोल के अंदर पानी का स्तर जांचकर रुकावट का पता लगाने पर काम किया।

25 फीट गहरी पेयजल लाइन लीकेज का मिनटों में लगेगा पता
अक्सर पानी की लीकेज ढूंढने के लिए पब्लिक हेल्थ विभाग अंदाजा लगाकर ही एक के बाद एक कई जगह गड्ढ़े खोदवाता है। लीकेज नहीं मिली तो ये सारी मेहनत बेकार है। अब 25 फीट गहरी जमीन की नमी बताने वाला यंत्र भी डेमों में इस्तेमाल किया गया। जिसके कारगर परिणाम आने की उम्मीद है।

रोजाना आती हैं 10 से 20 शिकायतें
पब्लिक हेल्थ विभाग के पास पाइप लाइन लीकेज व ठप सीवरेज की रोजाना ही तकरीब 10 से 20 शिकायतें आती हैं। इन सभी शिकायतों का निपटारा भी संभव नहीं हो पाता। ऐसे में अगर महीने भर की बात करें तो इन शिकायतों की संख्या 100 से 150 तक पहुंच जाती हैं।
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वर्जन
आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की एक टीम ने लीकेज ढूंढने व ठप सीवरेज का समाधान जाननेे के लिए सोनिक सोयल मेटल डिटेक्टर, नमी जांचने की मशीन व सीवरेज में रुकावट का पता लगाने के यंत्रों का इस्तेमाल किया है। सर्वेक्षण में सफलता भी मिली है, जिसकी रिपोर्ट दो दिनों में आ जाएगी। अगर ये प्रयोग सफल रहता है तो फिर पब्लिक हेल्थ विभाग प्राइवेट एजेंसी के माध्यम से ही ठप सीवरेज व पेयजल लाइन लीकेज को ढूंढकर उसका समाधान किया जाएगा।
-विजय जावला, जेई सीवरेज शाखा जनस्वास्थ्य विभाग
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