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सीबीएलयू में इस बार 41 पाठ्यक्रम, 11 नए होंगे

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पत्रकारों से बातचीत करते सीबीएलयू के कुलपति प्रो. आरके मित्तल साथ में रजिस्टार जितेंद्र भारद्वा - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू) के अंतर्गत आने वाले भिवानी और चरखी दादरी जिले के विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। विश्वविद्यालय ने इस शैक्षणिक सत्र से 11 नए पाठ्यक्रम शुरू कर दिए हैं। इसके साथ ही अब विश्वविद्यालय में कुल 41 पाठ्यक्रम हो गए हैं। वहीं इस बार विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या एक हजार से बढ़कर दो हजार होने की उम्मीद है। यह जानकारी वीरवार को कुलपति प्रो. आरके मित्तल और कुलसचिव डॉ. जितेंद्र भारद्वाज ने दी।
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प्रो. आरके मित्तल ने बताया कि विश्वविद्यालय ने 11 नए डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए हैं। जिनमें पीजीडीसीए, पीजी डिप्लोमा इन साइबर सिक्योरिटी एंड लॉ, पीजी डिप्लोमा इन डेटा साइंस एंड मशीन लर्निंग, पीजी डिप्लोमा इन पब्लिक हेल्थ, एडवांस पीजी डिप्लोमा इन गाइडेंस एंड कांउंसलिंग, बौद्धिक संपदा अधिकार में डिप्लोमा, डिप्लोमा इन ट्रैवल एंड टूरिज्म मैनेजमेंट, एमए ट्रांसलेशन, सर्टिफिकेट कोर्स इन डिजिटल मार्केटिंग, सर्टिफिकेट कोर्स इन कंप्यूटराइज्ड एकाउंटिंग, पीजी डिप्लोमा इन नैचुरोपैथी, योगा बलिसफुल लाइफ आदि हैं।
कुलपति प्रो. आरके मित्तल ने कहा कि चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय ने अपने गठन के मात्र कुछ वर्षों में ही खेल एवं शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। प्रेमनगर में अब विश्वविद्यालय का अपना भव्य भवन परिसर होगा, जोकि अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। विश्वविद्यालय का एक शैक्षणिक खंड बनकर लगभग तैयार हो चुका है। विश्वविद्यालय की प्राथमिकता विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना है। विश्वविद्यालय ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने की दिशा में काम शुरू कर दिया था। विद्यार्थियों की प्रतिभाओं को उभारने को प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पेपरलेस डिजिटल मार्कशीट की सुविधा दी जा रही है। आसपास के पांच गांव गोद लेकर विश्वविद्यालय उनमें सामाजिक जागरूकता अभियान चला रहा है। इस अवसर पर डीन शैक्षणिक प्रो. राधेश्याम, डीन ऑफ कॉलेज डॉ. एसके कौशिक, एडमिशन कोऑर्डिनेटर डॉ. मयंक किंगर, जनसंपर्क एवं मीडिया प्रभारी ऋषि शर्मा उपस्थित रहे।
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हॉबी क्लब बनाने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय
कुलपति प्रो. आरके मित्तल ने बताया कि विश्वविद्यालय ने 11 हॉबी क्लबों का गठन किया गया है। हॉबी क्लबों का गठन करने वाला यह प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय में चरित्र निर्माण एवं कौशल विकास को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व विकास पर विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा एवं शोध के माध्यम से स्थानीय एवं सामाजिक समस्याओं का हल निकालना है।
जल्द मिलेगा पानी का कनेक्शन
कुलसचिव डॉ. जितेंद्र भारद्वाज ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर को पूरी तरह तैयार करने का काम बहुत तेजी से चल रहा है। पानी के कनेक्शन के लिए मंजूरी मिल चुकी है। जल्द ही कनेक्शन भी ले लिया जाएगा। इसके अलावा जल्द ही इंटरनेट सुविधा के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए वाईफाई की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
780 विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था
डॉ. जितेंद्र भारद्वाज ने बताया कि लगभग डेढ़ साल के थोड़े से समय में बड़ी तेजी से दो आधुनिक शैक्षणिक खंडों का निर्माण कार्य पूरा होने जा रहा है। अक्तूबर के पहले सप्ताह से विज्ञान की कक्षा प्रारंभ होने जा रही हैं। इन दोनों शैक्षणिक खंडों में 12 स्मार्ट क्लास रूम होंगे, जिनमें लगभग 780 विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था है। इन आधुनिक शैक्षणिक खंडों में भूतल पर प्रशासन, कैंटीन, कॉमन लाइब्रेरी, 200 लोगों की क्षमता वाला मल्टीपर्पज लैब, सेमिनार हॉल, कॉन्फ्रेंस हॉल, कॉमन रूम, प्राथमिक उपचार कक्ष, केमिस्ट्री, फिजिक्स, गणित, बायोटेक, बॉटनी, जूलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी (लाइफ सांइस) के क्लास रूम, कंप्यूटर लैब, विभागीय लैब तथा कार्यालय आदि होंगे।
छात्राओं के लिए लगाया जाएगा ई-रिक्शा
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर काफी विस्तृत होगा, जो छात्राएं अपना वाहन लेकर नहीं आएंगी उनके लिए ई-रिक्शा की व्यवस्था की जाएगी। उन्हें गेट से शैक्षणिक भवनों तक जाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। इसके अलावा उपायुक्त ने यूनिवर्सिटी के पास बस स्टॉपेज बनाने की मांग को भी अनुमति दे दी है। इससे विद्यार्थियों को काफी सहूलियत होगी।
शोध बढ़ाने पर किया जाएगा कार्य
विश्वविद्यालय में फिलहाल नौ विभागों में 50 से ज्यादा शोधार्थी हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन भविष्य में शोध कार्य बढ़ाने पर जोर देगा। कुलपति प्रो. आरके मित्तल ने बताया कि शोध के विषय भी ऐसे लिए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को लाभ मिल सके। वहां की समस्याओं का समाधान निकाला जा सके।
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