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संतों का आशीर्वाद खोलता है मोक्ष का मार्ग : महंत अशोक गिरी

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जहरगिरी आश्रम में आयोजित भंडारे में पहुंचे संतों को दक्षिणा देते महंत डॉ. अशोक गिरी महाराज। संवा? - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। हालुवास गेट स्थित सिद्धपीठ बाबा जहरगिरी आश्रम में मंगलवार को परमहंस बाबा जहरगिरी की पुण्यतिथि पर विशाल संत समागम एवं उत्तर भारत के सबसे बड़े भंडारे का आयोजन किया गया। इस मौके पर सवा लाख लीटर गंगाजल से बनाए गए 551 किलो के पंचमेवा का लड्डू का प्रसाद चखने देश-विदेश से संत एवं भक्त पहुंचे। इस मौके पर आश्रम के महंत डॉ. अशोक गिरी ने कहा कि संतों के आशीर्वाद से मोक्ष का मार्ग खुलता है।
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मंदिर में सजावट के लिए पुणे से मंगवाई गई लाइटें मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। इसके साथ ही प्रसाद बनाने में दो हलवाइयों ने निशुल्क सेवा दी। आश्रम के पीठाधीश्वर अंतरराष्ट्रीय श्रीमहंत जूना अखाड़ा डॉ. अशोक गिरी महाराज ने संत समागम में पहुंचे संतों को गर्म वस्त्र एवं दक्षिणा देकर उनका सम्मान किया। सबसे पहले आश्रम के पीठाधीश्वर अंतरराष्ट्रीय श्रीमहंत ने विशेष औषधि से बाबा जहरगिरी की प्रतिमा का जलाभिषेक किया। इस मौके पर जेबी गुप्ता अस्पताल की टीम से डॉ. आशीष मित्तल ने निशुल्क चिकित्सा शिविर में फ्री दवाइयां वितरित की। इसके साथ ही कोविड जांच शिविर लगाया गया।
दो पखवाड़े से की जा रही थी तैयारी
बाबा जहरगिरी की पुण्यतिथि पर मंगलवार को आयोजित हुए कार्यक्रम की तैयारी पिछले दो पखवाड़े से की जा रही थी। एक तरफ जहां प्रसाद के लिए हरिद्वार से सवा लाख लीटर गंगाजल मंगवाया गया तो दूसरी तरफ दर्जनों हलवाइयों ने जुटकर प्रसाद बनाया। एक से नौ जनवरी तक श्रीराम कथा का आयोजन हुआ। नवचंडी महायज्ञ में पूर्णाहुति के साथ पुण्यतिथि पर भंडारे का आयोजन किया गया।
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हिंदु धर्म में साधु-संतों का विशेष महत्व : ब्रह्मचारी महाराज
ब्रह्मचारी महाराज ने बताया कि हिंदु धर्म में साधु-संतों को विशेष सम्मान के तौर पर देखते हैं। इसलिए किसी भी धार्मिक कार्य के अनुष्ठान में साधु-संतों का सम्मान बहुत महत्व रखता है। इसलिए बाबा जहरगिरी की पुण्यतिथि पर देश भर के साधु-संत यहां पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि सर्वप्रथम परमहंस बाबा जहरगिरी महराज का ध्यान कर गंगाजल, दूध, दही, घी, मधु, शक्कर, केसर, कस्तूरी, स्वर्ण रजत, गोरोचन, गोमय गोअर्क सहित मुरा, जटामांसी, वच, कुष्ठ, शिलाजीत, हल्दी और दारुहल्दी, सठी, चंपक सर्वोषधि के जलों से जलाभिषेक किया। तत्पश्चात हवन-यज्ञ का आयोजन हुआ। उसके बाद सवा लाख लीटर गंगाजल से बने 551 किलो के पंचमेवा का लड्डू का प्रसाद वितरित किया गया।
ये साधु-संत पहुंचे
जूना अखाड़ा की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गिरी जी, राजस्थान साधु समाज के प्रांतीय अध्यक्ष बाबू गिरी, गुजरात मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष प्रेम भारती, महाराष्ट्र मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष निरंजन भारती, पंजाब मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष संतोष गिरी, जम्मू कश्मीर के मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष रथी गिरी, उत्तर प्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष विजय गिरी, ब्रह्मचारी महाराज, दिल्ली से रमन गिरी, पूर्वांचल यूपी से शैलेंद्र गिरी, जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय सचिव मोहन भारती, जूना अखाड़ा बनारस से कमल भारती, जूना अखाड़ा त्रयंबकेश्वर से महेश पुरी, जूना अखाड़ा उज्जैन से पृथ्वी गिरी, जूना अखाड़ा जूनागढ़ से देवेंद्र गिरी, भगवान गिरी, बाबा कैलाश गिरी, संगम गिरी सहित अनेक साधु-संत मौजूद रहे।
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